देवगढ़ के होम-स्टे मॉडल से प्रभावित हुए पुणे, नासिक और धुले के प्रतिनिधि ग्रामीण पर्यटन की बारीकियों को समझा
रेवांचल टाइम्स छिंदवाड़ा
जितेन्द्र अलबेला
मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले का पर्यटन ग्राम देवगढ़ अब केवल पर्यटकों के लिए ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों के लिए ‘लर्निंग हब’ के रूप में उभर रहा है। हाल ही में महाराष्ट्र के पुणे, नासिक और धुले जिलों से आए 40 सदस्यीय दल ने देवगढ़ का दो दिवसीय दौरा कर यहाँ के होम-स्टे संचालन और अतिथि सत्कार की बारीकियों को सीखा।

ऐतिहासिक धरोहरों के साथ अनुभव किया ग्रामीण जीवन
महाराष्ट्र के ‘शबरी आदिवासी वित्त एवं विकास महामंडल’ के इस दल ने देवगढ़ के ऐतिहासिक किले, प्राचीन पहाड़ियों और बावड़ियों का अवलोकन किया। दल के सदस्यों ने न केवल किताबी ज्ञान लिया, बल्कि दो दिनों तक स्थानीय होम-स्टे में रहकर खुद अनुभव किया कि कैसे एक आदिवासी परिवार पर्यटकों की मेजबानी करता है।
प्रशासनिक नेतृत्व और तकनीकी मार्गदर्शन
कलेक्टर हरेंद्र नारायन और जिला पंचायत सीईओ अग्रिम कुमार के मार्गदर्शन में जिले में होम-स्टे परियोजना नई ऊंचाइयां छू रही है।
कार्यशाला के दौरान
प्रभारी अधिकारी भोपाल आरडी सिद्दीकी ने बुकिंग प्रक्रिया, मार्केटिंग और पर्यटकों की सुविधाओं के बारे में विस्तार से बताया।
जय भवानी ग्राम विकास समिति ने दल के ठहरने और भोजन की सुचारू व्यवस्था संभाली।
अनुभव साझा करते हुए दल ने माना कि मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड की यह परियोजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का बेहतरीन उदाहरण है।
भ्रमण दल की महिला सदस्य ने कहा,
यहाँ की सबसे खास बात यह है कि पूरा परिवार पर्यटन गतिविधियों में शामिल होता है। हमने सीखा कि कैसे कम संसाधनों में भी पर्यटकों को विश्वस्तरीय अनुभव दिया जा सकता है। अब हम इन गुरों को महाराष्ट्र के गांवों में लागू करेंगे।
भ्रमण के मुख्य आकर्षण और लाभ
जमीनी अनुभव, दल ने अलग-अलग होम-स्टे में रुककर संचालकों के वास्तविक अनुभवों को साझा किया।
टिप्स और ट्रिक्स, पर्यटकों को आकर्षित करने और होम-स्टे को सुविधाजनक बनाने के व्यावहारिक गुर सीखे।
सांस्कृतिक विनिमय, आदिवासी संस्कृति और खान-पान को करीब से जाना, जो भविष्य में उनके अपने होम-स्टे के लिए ‘यूनिक सेलिंग पॉइंट’ (USP) बनेगा।
इस अवसर पर नोडल अधिकारी बलराम राजपूत, पर्यटन प्रबंधक गिरीश लालवानी और ‘बैक टू विलेज’ संस्था की तन्या सिन्हा सहित स्थानीय संचालक उपस्थित रहे। देवगढ़ का यह सफल मॉडल अब महाराष्ट्र के पर्यटन मानचित्र को संवारने में मदद करेगा।
