घटिया निर्माण पर पर्दा क्यों…?
जांच से आखिर किसे बचाया जा रहा है?
दैनिक रेवांचल टाईम्स – मंडला । मध्य प्रदेश के मंडला जिले सहित आसपास के क्षेत्रों में रेलवे के नाम पर चल रहे निर्माण कार्य अब सवालों के घेरे में आ चुके हैं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि शासन-प्रशासन, जनप्रतिनिधि और जिम्मेदार विभाग आंखें मूंदे बैठे हुए हैं। रेलवे प्लेटफार्म, भवन निर्माण और अन्य विकास कार्यों में गुणवत्ता की भारी कमी दिखाई दे रही है, फिर भी जांच के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है।
लोगों का कहना है कि रेलवे के कई काम ऐसे हैं जिनकी निष्पक्ष जांच हो जाए तो करोड़ों रुपये के खेल और लापरवाही की परतें खुल सकती हैं। लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इन कामों की जांच कराने से सरकार और प्रशासन क्यों बच रहा है? क्या जिम्मेदारों को जनता की सुरक्षा और सरकारी धन की चिंता नहीं है?
मंडला, नैनपुर, सिवनी सहित कई जिलों में रेलवे के निर्माण कार्य तेजी से चल रहे हैं, लेकिन कई जगहों पर निर्माण सामग्री की गुणवत्ता, अधूरे काम और तकनीकी खामियां साफ दिखाई दे रही हैं। इसके बावजूद न तो प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचता है और न ही जनप्रतिनिधि जनता की आवाज उठाते नजर आते हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि रेलवे विभाग अपने स्तर पर कभी-कभार औपचारिक जांच कर मामला ठंडे बस्ते में डाल देता है। यही वजह है कि निर्माण एजेंसियों के हौसले बुलंद हैं और गुणवत्ता को ताक पर रखकर काम किया जा रहा है।
वही जनता अब मांग कर रही है कि रेलवे के सभी निर्माण कार्यों की उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच कराई जाए, दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो और पूरी सच्चाई जनता के सामने लाई जाए। क्योंकि यदि समय रहते जांच नहीं हुई तो आने वाले समय में यही लापरवाही किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
