ट्राइबल भूमि पर कब्जे का बड़ा खेल! सरकारी कर्मचारियों ने बना लिए मकान, गर्ल्स हॉस्टल परियोजना अधर में

Revanchal
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दैनिक रेवांचल टाईम्सहर्रई छिंदवाड़ा / हर्रई क्षेत्र में आदिवासी (ट्राइबल) भूमि पर कथित अवैध कब्जे और बिना वैध दस्तावेजों के भूमि के विक्रय का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि सरकारी कर्मचारियों ने नियमों को दरकिनार कर ट्राइबल भूमि पर अपने आवास बना लिए, जिसके कारण शासन की महत्वाकांक्षी गर्ल्स हॉस्टल निर्माण परियोजना अटक गई है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि संबंधित भूमि का बिना वैध अभिलेखों और विधिक प्रक्रिया के लेन-देन किया गया। अब जब शासन ने उसी क्षेत्र में गर्ल्स हॉस्टल निर्माण की योजना बनाई है, तो भूमि विवाद सामने आने से निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पा रहा है। इससे क्षेत्र की छात्राओं को मिलने वाली सुविधाओं पर भी असर पड़ रहा है।


मामले में कर्मचारी प्रताप वर्मा का नाम है जिन्होंने सरकारी जमीन पर कब्जा कर मकान बनाया एवं फायदे के चक्कर में उसे बेच भी दिया प्रताप सिंह वर्मा अभी वर्तमान में माध्यमिक शाला मुआरसानी मैं पदस्थ है जबकि वह आदिवासी विभाग में शिक्षक के पद पर पदस्थ हैं अब यह मामला सामने आने का दावा किया जा रहा है। ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराने, ट्राइबल भूमि के कथित अवैध कब्जों की पड़ताल करने तथा दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की है।

यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला आदिवासी भूमि संरक्षण कानूनों के उल्लंघन और शासकीय योजनाओं में बाधा पहुंचाने का गंभीर प्रकरण साबित हो सकता है। अब सभी की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है।

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