बारिश में खोदी नाली बनी मौत का जाल! एमपीजेआरटीसी की लापरवाही से स्कूली बच्चों की जान जोखिम में, काम आधा-अधूरा छोड़ गायब ठेकेदार

Revanchal
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पानी से लबालब नाली बनी हादसों का इंतजार… जिम्मेदार कब जागेंगे?

दैनिक रेवांचल टाइम्स | घुघरी, मंडला
तहसील मुख्यालय घुघरी में विकास कार्यों के नाम पर की जा रही लापरवाही अब लोगों की जान पर भारी पड़ने लगी है। स्टेट बैंक के समीप एमपीजेआरटीसी द्वारा कराए जा रहे नाली निर्माण कार्य की सुस्त गति और अव्यवस्थित कार्यप्रणाली ने पूरे क्षेत्र को परेशानी में डाल दिया है। बरसात के बीच नाली खोदकर उसे अधूरा छोड़ दिया गया, जिससे अब वह लोगों के लिए सुविधा नहीं बल्कि हादसों का खुला निमंत्रण बन गई है।


स्कूल जाने वाले मासूम सबसे ज्यादा खतरे में
हर दिन इसी रास्ते से गुजरने वाले स्कूली बच्चे बारिश के पानी से भरी गहरी नाली के किनारे जान जोखिम में डालकर आने-जाने को मजबूर हैं। पानी भर जाने से नाली की गहराई दिखाई नहीं देती, जिससे कभी भी कोई बच्चा फिसलकर गंभीर हादसे का शिकार हो सकता है। सवाल यह है कि यदि कोई अप्रिय घटना हो जाती है तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा—ठेकेदार, एमपीजेआरटीसी या संबंधित विभाग?


न सुरक्षा, न चेतावनी… आखिर किसकी लापरवाही?
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि निर्माण स्थल पर न तो बैरिकेडिंग की गई है, न चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं और न ही सुरक्षा के अन्य आवश्यक इंतजाम किए गए हैं। ऐसे में बरसात के मौसम में निर्माण कार्य कर आम नागरिकों को जोखिम में डालना विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
बारिश में ही क्यों शुरू किया निर्माण?
क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य बारिश से पहले या मानसून समाप्त होने के बाद किया जाता तो यह समस्या ही उत्पन्न नहीं होती। बिना उचित योजना के कार्य शुरू कर अधूरा छोड़ देना यह दर्शाता है कि जनता की सुरक्षा से अधिक औपचारिकताएं पूरी करने पर ध्यान दिया जा रहा है।
जनता पूछ रही है…
क्या निर्माण एजेंसी के लिए लोगों की जान से बढ़कर कोई और प्राथमिकता है?
बारिश में अधूरा निर्माण छोड़ने की अनुमति किसने दी?
सुरक्षा मानकों का पालन क्यों नहीं किया गया? यदि कोई दुर्घटना होती है तो जिम्मेदार कौन होगा?
तत्काल कार्रवाई की मांग
क्षेत्रवासियों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की है कि नाली निर्माण कार्य युद्ध स्तर पर पूरा कराया जाए, निर्माण स्थल पर तत्काल बैरिकेडिंग, चेतावनी संकेत एवं सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए तथा कार्य में लापरवाही बरतने वाले ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
वही स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार करने के बजाय समय रहते कार्रवाई करे, क्योंकि विकास कार्य तभी सार्थक हैं जब वे जनता की सुरक्षा के साथ पूरे किए जाएं।

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