भक्ति में दिखावा नही होता,निस्वार्थ प्रेम पसंद है परमात्मा को- नागेंद ब्रह्मचारी महाराजमटकी फोड़ी गई

Revanchal
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रेवांचल टाइम्स छिन्दवाड़ा

स्थानीय अनगढ़ हनुमान मंदिर में आयोजित श्री मद भागवत कथा में व्यासपीठ पर विराजमान भगवताचार्य नागेन्द्र ब्रह्मचारी ने कथा के पांचवे दिन कहा कि परमात्मा को निस्वार्थ प्रेम पसंद है भक्ति में ऊपरी दिखावा नही अंतःकरण की पवित्रता की आवश्यकता है ऊंच नीच छुआछुत मानवता के शत्रु हैं श्री कृष्ण की बाल लीला एवं परमात्मा के स्वभाव का वर्णन किया सर्व समर्थ शक्तिवान होते हुए भी साधारण मानव को आपस में प्रेम से रहना सिखाया सूंदर रूप ,धन इसका महत्व नही रखते हमारे भाव पवित्र हों परमात्मा को ढूंढना नही पड़ता वे स्वयं भक्त को खोज लेते हैं

जीवन मे प्रेम,सरलता, सेवा,परोपकार ऐसे सुगम हैं जो परमात्मा को अपनी खुशबू से आकर्षित कर लेते हैं जिसके जीवन मे सरलता एवं सहजता आ गयी उसका जीवन धन्य हो जाता है हर व्यक्ति अपने आप को बड़ा एवं महान कहलाना चाहता है परंतु जीवन मे सरलता आ गयी तो व्यक्ति स्वयं महान बन जाता है प्रयत्न नही करना पड़ता भगवान कृष्ण चराचर के नामक होने पर भी अपनी प्रभुता छोड़ थोड़े से छाछ के लिए जमीन पर ले जाते हैं

पूतना सूंदर रूप बनाकर आयी थी उसका वध किये गोवर्धन उठाने गोप गोपिओं के साथ सहज लीला करते हैं गोपियों संग घर का कार्य करते हैं अपनी बाल लीला में बालकों के साथ बांटकर भोजन करने की शिक्षा दी कन्हैया ने समाज मे अशांति करने वाले बलशाली सकरासुर,तृणावत ,अघासुर ,बकासुर का वध कर समाज को स्वछ बनाने का कार्य किया छोटी छोटी ग्याल टोलियों में माखन के लिए नाचते भी हैं और गोपियों को नचाते भी हैं जो बाललीला का ध्यान करता हैं उसे सहज में ही भक्ति एवं मुक्ति प्राप्त हो जाती है जो जप तप मंत्र से नही मिल पाती ग्वाल वालों के संग माखन चोरी मटकी फोड़ने की झांकी सजाई गई जिसका भक्तों ने आनंद लिया बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर पूण्य लाभ लिया आरती प्रसाद का वितरण किया गया

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