सप्ताहिक बाजार बना अवैध वसूली का अड्डा! पंडरिया पंचायत में ठेकेदार की मनमानी से छोटे व्यापारी बेहाल

Revanchal
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दैनिक रेवांचल टाईम्स – जनपद पंचायत नारायणगंज अंतर्गत पंडरिया पंचायत के अधीन लगने वाला सप्ताहिक बाजार इन दिनों भ्रष्टाचार, अवैध वसूली और प्रशासनिक चुप्पी को लेकर सवालों के घेरे में है। बाजार में छोटे व्यापारियों और सब्जी विक्रेताओं से नियमों के विपरीत मनमाने तरीके से राशि वसूले जाने के आरोप सामने आए हैं। व्यापारियों का कहना है कि पंचायत द्वारा तय शुल्क कुछ और है, लेकिन मौके पर ठेकेदार खुलेआम अपनी “मनमर्जी की सरकार” चला रहा है।


जानकारी के अनुसार सप्ताहिक बाजार में दुकान लगाने आने वाले छोटे व्यापारियों से 30 रुपये निर्धारित शुल्क की जगह 80 से 100 रुपये तक वसूले जा रहे हैं। इतना ही नहीं, अधिकांश मामलों में व्यापारियों को कोई रसीद तक नहीं दी जाती। ऐसे में बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर यह राशि किसकी जेब में जा रही है और पंचायत प्रशासन इस पूरे खेल पर मौन क्यों है?
व्यापारियों का आरोप है कि यदि कोई दुकानदार अधिक वसूली का विरोध करता है तो उसे बाजार से दुकान हटवाने और अगली बार जगह न देने की धमकियां दी जाती हैं। गरीब और छोटे स्तर के व्यापारी रोज कमाकर खाने वाले लोग हैं, लेकिन ठेकेदार की दबंगई के आगे उनकी आवाज दबाई जा रही है। मजबूरी में व्यापारी अवैध वसूली सहने को विवश हैं।
हैरानी की बात यह है कि पूरे मामले की जानकारी ग्राम पंचायत के जिम्मेदारों — सरपंच और सचिव — को भी दी जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे ग्रामीणों और व्यापारियों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या पंचायत प्रशासन की मौन सहमति से यह अवैध वसूली का खेल चल रहा है? यदि नहीं, तो फिर जिम्मेदारों द्वारा कार्रवाई करने में इतनी देरी क्यों?
नारायणगंज क्षेत्र का यह सप्ताहिक बाजार आसपास के ग्रामीण इलाकों के छोटे व्यापारियों की आजीविका का बड़ा माध्यम है। लेकिन लगातार हो रही नियम विरुद्ध वसूली के कारण अब व्यापारी यहां आने से भी हिचकिचाने लगे हैं। व्यापारियों का कहना है कि यदि कमाई का बड़ा हिस्सा ठेकेदार की जेब में ही चला जाएगा तो आखिर वे अपने परिवार का पालन-पोषण कैसे करेंगे?
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि जनपद पंचायत, जिला प्रशासन और संबंधित विभाग तत्काल बाजार वसूली की जांच कराए, ठेके की शर्तों को सार्वजनिक करे और अवैध वसूली करने वालों पर कड़ी कार्रवाई करे। अन्यथा यह साफ माना जाएगा कि गरीब व्यापारियों की मेहनत की कमाई पर खुलेआम डाका डाला जा रहा है और जिम्मेदार अधिकारी तमाशबीन बने हुए हैं।

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