मज़दूर दिवस पर मंडला कांग्रेस का ज़मीनी संवाद: हक़, सुरक्षा और सम्मान पर उठी बुलंद आवाज़

Revanchal
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दैनिक रेवांचल टाइम्स, मंडला।
1 मई, अंतरराष्ट्रीय मज़दूर दिवस के अवसर पर मंडला जिला कांग्रेस ने जिले के विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग टीमों के माध्यम से मज़दूरों से मुलाक़ात कर उनकी समस्याओं को करीब से समझा। मनेरी, कान्हा, माइंस एरिया और मंडला नगर में पार्टी पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं ने खेतिहर मजदूरों, मनरेगा श्रमिकों, दिहाड़ी मज़दूरों, गिग वर्कर्स और पलायन करने वाले श्रमिकों से सीधा संवाद किया।


जिला अध्यक्ष के नेतृत्व में शिव कुमार मरकाम, गोलू पटेल, सतीश झरिया, मुकेश कच्छवाहा (जिला महामंत्री) और रतन वरकड़े (जिला अध्यक्ष, असंगठित कामगार एवं कर्मचारी कांग्रेस) सहित कई कार्यकर्ता इस अभियान में शामिल रहे। इस दौरान श्रमिकों की जमीनी हकीकत और उनकी परेशानियों को गंभीरता से सुना गया।


मुद्दों की हकीकत: मेहनत ज़्यादा, हक़ कम
मंडला जैसे आदिवासी बहुल जिले में मजदूर आज भी असंगठित और असुरक्षित स्थिति में काम कर रहे हैं।
मनेरी के औद्योगिक क्षेत्र में स्थानीय युवाओं को रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं मिल रहे, जिससे पलायन मजबूरी बन गया है।


डोलोमाइट माइंस में हजारों मजदूर बिना सुरक्षा, बीमा और ईपीएफ जैसी सुविधाओं के काम कर रहे हैं।
मनरेगा के तहत मजदूरी भुगतान महीनों से लंबित है, जिससे श्रमिकों का भरोसा टूट रहा है।


रेत, गिट्टी, निर्माण और रिसॉर्ट सेक्टर में काम करने वाले मजदूर जान जोखिम में डालकर काम कर रहे हैं, लेकिन सुरक्षा मानक नदारद हैं।
गिग वर्कर्स और आउटसोर्स कर्मचारियों की स्थिति और भी गंभीर है—न स्थायित्व, न सामाजिक सुरक्षा।


मुख्य मांगें: हक़ और सम्मान की गारंटी
कांग्रेस द्वारा मजदूरों की समस्याओं के आधार पर सरकार और प्रशासन से प्रमुख मांगें रखी गईं—

  1. सुरक्षा का अधिकार:
    हर कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों का पालन हो, सभी मजदूरों का पंजीयन और बीमा अनिवार्य किया जाए, दुर्घटना की स्थिति में तुरंत मुआवजा और जिम्मेदारों पर कार्रवाई हो।
  2. पूरा काम, पूरा दाम:
    8 घंटे कार्य का नियम लागू हो, ओवरटाइम का पूरा भुगतान मिले, दिहाड़ी और गिग वर्कर्स को समय पर मजदूरी दी जाए।
  3. कानून ज़मीन पर दिखे:
    श्रम कानूनों का सख्ती से पालन हो, ठेकेदारों और कंपनियों का भी अनिवार्य रजिस्ट्रेशन हो ताकि जवाबदेही तय हो सके।
  4. सम्मान और सामाजिक सुरक्षा:
    मजदूरों के लिए पेंशन, आवास, स्वास्थ्य और बच्चों की शिक्षा जैसी सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं, ताकि उन्हें सम्मानजनक जीवन मिल सके।
    चेतावनी भी दी
    कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट कहा कि यदि मजदूरों को उनका हक़ नहीं मिला, तो यह आवाज़ और तेज़ होगी और संघर्ष को व्यापक रूप दिया जाएगा।
    वही मंडला में विकास की नींव रखने वाला मजदूर आज भी सबसे ज्यादा उपेक्षित है। मजदूर दिवस केवल उत्सव नहीं, बल्कि अधिकारों की लड़ाई का प्रतीक है—और इस बार यह लड़ाई जमीन से उठती दिख रही है।
    मजदूर एकता जिंदाबाद!
    श्रम का सम्मान!
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