हादसे का इंतजार कर रहा प्रशासन?” मुन्नीबाई घाट बना मौत का जालजर्जर सीढ़ियां, टूटता ढांचा और गंदगी से घिरा नर्मदा तट

Revanchal
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दावे बड़े, जमीनी हकीकत शर्मनाक

दैनिक रेवाँचल टाईम्स – मंडला।मां नर्मदा के पावन तट पर बसे मंडला में विकास के दावों की पोल अब खुलकर सड़कों—और घाटों—पर बिखरी नजर आ रही है। मुन्नीबाई धर्मशाला घाट की हालत देखकर साफ कहा जा सकता है कि यहां प्रशासन विकास नहीं, बल्कि हादसे का इंतजार कर रहा है। वर्षों से जर्जर पड़े इस घाट की टूटी सीढ़ियां और कमजोर ढांचा हर दिन श्रद्धालुओं को मौत के मुहाने तक ले जा रहा है, लेकिन जिम्मेदार आंखें मूंदे बैठे हैं।


यह कोई नई समस्या नहीं है। स्थानीय लोग, श्रद्धालु और सामाजिक संगठन लगातार आवाज उठा रहे हैं, आवेदन दे रहे हैं, जनसुनवाई में गुहार लगा रहे हैं—लेकिन नतीजा शून्य। सवाल सीधा है—क्या प्रशासन को किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार है, ताकि फिर कागजी संवेदनाएं और जांच समितियों का खेल शुरू हो सके?


नर्मदा तट विकास के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च होने के दावे किए जाते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि विकास का सारा “श्रेय” कुछ चुनिंदा घाटों तक सीमित कर दिया गया है। बाकी घाटों को भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है। मुन्नीबाई धर्मशाला घाट, जो धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है, आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है।


स्थिति तब और भयावह हो जाती है जब नर्मदा में गिरते गंदे नालों की सच्चाई सामने आती है। शहर के करीब 16 नालों का गंदा पानी सीधे मां नर्मदा में बहाया जा रहा है। एक ओर नदी को ‘मां’ कहकर पूजने की परंपरा, दूसरी ओर उसी मां को गंदगी से भरने की व्यवस्था—यह दोहरा चरित्र अब लोगों को खटकने लगा है।


उधर माहिष्मती घाट में हुए निर्माण कार्यों पर भी सवालों की आंधी उठ रही है। स्थानीय नागरिक खुलकर कह रहे हैं कि यदि इन कार्यों की निष्पक्ष जांच हो जाए, तो “विकास” के नाम पर हुए खेल की परतें खुल सकती हैं। आखिर क्यों एक ही घाट पर पैसा बहाया जा रहा है और बाकी को सड़ने के लिए छोड़ दिया गया है?


अब जनता का गुस्सा साफ नजर आने लगा है। लोगों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही मुन्नीबाई धर्मशाला घाट का पुनर्निर्माण और मरम्मत नहीं कराई गई, तो यह मुद्दा सड़कों से लेकर जनआंदोलन तक पहुंचेगा।
स्पष्ट है—अगर समय रहते जिम्मेदार नहीं चेते, तो मुन्नीबाई घाट की यह बदहाली किसी दिन बड़ी त्रासदी में बदल सकती है… और तब सवालों के जवाब देना मुश्किल होगा।

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