“कुंभकर्णी नींद” में सोए जिम्मेदारों को जगाने की कोशिश
दैनिक रेवांचल टाईम्स – मंडला। जिले में स्थित विश्व विख्यात कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघों की लगातार हो रही संदिग्ध मौतों को लेकर पत्रकारों का आंदोलन अब जनआक्रोश का रूप लेता जा रहा है। धरने के आठवें दिन आंदोलनकारियों ने कान्हा प्रबंधन, जिला प्रशासन और जिले के जनप्रतिनिधियों की “चुप्पी और निकम्मेपन” के खिलाफ अनोखा विरोध दर्ज करते हुए संगीतमय सुंदरकांड और भजन संध्या का आयोजन किया।
कलेक्ट्रेट मार्ग पर आयोजित इस कार्यक्रम में सैकड़ों श्रद्धालु, सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न संगठनों के लोग पहुंचे। पूरा धरना स्थल भगवान श्रीराम के जयकारों, भजनों और सुंदरकांड के पाठ से गूंज उठा।
आंदोलनकारियों का कहना था कि जब जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि जनता की आवाज सुनने को तैयार नहीं हैं, तब शायद धार्मिक आयोजन और जनजागरण से उनकी “सोई हुई संवेदनाएं” जाग सकें।
धरने में शामिल पत्रकारों ने आरोप लगाया कि कई दिनों से आंदोलन जारी है, लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं, लेकिन कान्हा प्रबंधन अब तक बाघों की मौत पर कोई स्पष्ट जवाब देने को तैयार नहीं है।
न जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जा रही है और न ही जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई कार्रवाई दिखाई दे रही है। इससे लोगों में आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है।
विशेष बात यह रही कि यह धार्मिक आयोजन श्री नवयुवक शिव मंडल आजाद वार्ड मंडला द्वारा कराया गया। मंडल के सदस्यों ने कहा कि जंगल, वन्यजीव और पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की नहीं बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। यदि देश के सबसे चर्चित टाइगर रिजर्व में लगातार बाघ मर रहे हैं और जिम्मेदार मौन हैं, तो यह बेहद गंभीर विषय है।
धरने पर बैठे पत्रकारों ने जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जनता के मुद्दों पर बड़ी-बड़ी बातें करने वाले नेता अब पूरी तरह खामोश हैं। न कोई धरना स्थल पहुंच रहा, न कोई जवाब मांग रहा और न ही कोई खुलकर कान्हा प्रबंधन से सवाल कर रहा है।
आंदोलनकारियों का आरोप है कि “सब कुछ जानते हुए भी जिम्मेदार लोग आंख और कान बंद किए बैठे हैं।”
गौरतलब है कि आंदोलनकारी पत्रकारों ने एक दिन पहले प्रधानमंत्री Narendra Modi के नाम ज्ञापन सौंपकर बाघों की मौत की उच्चस्तरीय जांच और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की थी।
