
दैनिक रेवांचल टाइम्स, मंडला/देश बड़ा अद्भुत दौर देख रहा है। यहां दस रुपए का डायपर बनाने वाली कंपनी पूरे आत्मविश्वास से कहती है — “लीक नहीं होगा”…
और दूसरी तरफ लाखों रुपए की फीस लेने वाली देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा हर साल यही कहती नजर आती है — “देखते हैं इस बार क्या होता है…”
अब हालात ऐसे हो गए हैं कि छात्र डॉक्टर बनने से पहले जासूस बनने पर मजबूर हैं।
कौन सा सेंटर सुरक्षित है, कौन सा गैंग सक्रिय है, पेपर कहां से निकलेगा और कब वायरल होगा — ये सब जानकारी शायद अब फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी से भी ज्यादा जरूरी हो गई है।
एक तरफ गांव का गरीब किसान अपनी जमीन गिरवी रखकर बच्चे को कोचिंग भेजता है, मां अपने गहने बेच देती है, पिता ओवरटाइम करता है… और दूसरी तरफ पेपर लीक माफिया एयरकंडीशन कमरों में बैठकर बच्चों के सपनों की बोली लगाते हैं।
सबसे मजेदार बात यह है कि हर बार जांच होगी, कार्रवाई होगी, सख्त कदम उठेंगे — ऐसा कहा जाता है।
फिर अगली परीक्षा आते-आते पूरा सिस्टम ऐसा व्यवहार करता है जैसे पिछली बार कुछ हुआ ही नहीं।
अब मेहनती और ईमानदार पढ़ाई करने वाले छात्र पूछ रहे हैं कि जब एक छोटी सी डायपर कंपनी अपने प्रोडक्ट के लिए “एंटी-लीक टेक्नोलॉजी” ला सकती है, तो करोड़ों के बजट वाली परीक्षा एजेंसी आखिर किस टेक्नोलॉजी पर चल रही है?
या फिर सिस्टम ने मान लिया है कि पेपर लीक अब परीक्षा प्रक्रिया का “सिलेबस” बन चुका है।
मांगें हो रही हैं — जांच हो, जवाबदेही तय हो, दोषियों को सजा मिले।
लेकिन देश का युवा अब सिर्फ आश्वासन नहीं चाहता, उसे भरोसा चाहिए… क्योंकि हर लीक हुए पेपर के साथ सिर्फ प्रश्नपत्र बाहर नहीं आता, बल्कि लाखों मेहनती छात्रों का मनोबल भी टूट जाता है।
अब देखना यह है कि सरकार और एजेंसियां इस “लीक होती व्यवस्था” पर पैबंद लगाती हैं या फिर अगली परीक्षा तक नया बहाना तैयार करती हैं।
देश के लाखों छात्र-छात्राएं हर वर्ष NEET परीक्षा में सिर्फ एक सपना लेकर बैठते हैं — डॉक्टर बनने का सपना। माता-पिता अपनी जीवनभर की जमा पूंजी, कर्ज और अथक मेहनत बच्चों की पढ़ाई पर खर्च करते हैं, ताकि उनका भविष्य सुरक्षित हो सके।
लेकिन जब मेहनत करने वाले छात्रों को यह पता चलता है कि परीक्षा का पेपर पहले ही लीक हो चुका था, तब केवल एक परीक्षा नहीं टूटती, बल्कि छात्रों का आत्मविश्वास, भरोसा और भविष्य भी बिखर जाता है।
2015 के AIPMT, 2024 के NEET विवाद और अब 2026 में फिर सामने आए पेपर लीक के आरोपों ने देशभर के छात्रों में भारी नाराजगी पैदा कर दी है। छात्र अब सवाल उठा रहे हैं कि “जब दस रुपए का डायपर बनाने वाली कंपनी लीक न होने की गारंटी दे सकती है, तो लाखों रुपए फीस लेने वाली परीक्षा प्रणाली क्यों नहीं?”
इसी मुद्दे को लेकर NSUI ने केंद्र सरकार और परीक्षा एजेंसी पर गंभीर आरोप लगाते हुए देशव्यापी “NEET 2026 न्याय अभियान” शुरू करने की घोषणा की है।
NSUI की प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं —
NTA को तत्काल भंग किया जाए
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें
सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में CBI जांच कराई जाए
प्रभावित छात्रों को मुफ्त मानसिक स्वास्थ्य सहायता मिले
छात्रों को निशुल्क कानूनी सहायता दी जाए आर्थिक मुआवजा और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाए
छात्र संगठन का कहना है कि यदि दोबारा परीक्षा आयोजित की जाती है तो सरकार को छात्रों और उनके परिवारों के लिए मुफ्त परिवहन, ठहरने और अन्य बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था भी करनी चाहिए।
भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन मंडला जिला अध्यक्ष सौरभ साहू ने कहा कि परीक्षा से जुड़ी लगातार सामने आ रही अनियमितताओं ने देश के युवाओं का भरोसा हिला दिया है। लाखों छात्र वर्षों तक कठिन मेहनत कर मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी करते हैं, लेकिन पेपर लीक माफिया उनकी मेहनत पर पानी फेर देते हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार NEET-UG 2026 परीक्षा को पेपर लीक संबंधी आरोपों के बाद रद्द किए जाने की चर्चाएं सामने आई हैं। वहीं, NEET-UG 2024 विवाद भी CBI जांच और सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका था।
जिला कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. अशोक मर्सकोले ने कहा कि यह केवल परीक्षा का मुद्दा नहीं, बल्कि गरीब, मध्यमवर्गीय और ग्रामीण परिवारों के सपनों का सवाल है। कोचिंग, फॉर्म फीस, यात्रा और वर्षों की मेहनत के बाद यदि परीक्षा प्रणाली ही सुरक्षित न हो, तो सबसे ज्यादा नुकसान ईमानदार छात्रों को उठाना पड़ता है।
वही इस दौरान छात्र संगठन मंडला के नगर अध्यक्ष अंकित रजक, राहुल दुबे, प्रणय भंडारी एवं मीडिया विभाग से विवेक दुबे उपस्थित रहे।
