रसोइयों में फूटा आक्रोश, सरकार के फैसले से भारी नाराजगी
दैनिक रेवांचल टाईम्स – मंडला। मध्य प्रदेश के मंडला जिले में मध्यान भोजन कार्यक्रम के अंतर्गत वर्षों से खाना बनाने का कार्य कर रहे रसोइयों को हटाने की कार्रवाई ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। इस फैसले के खिलाफ सहायता समूहों और रसोईया संघ में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। रसोईया संघ द्वारा मंडला कलेक्टर को जनसुनवाई में आवेदन सौंपकर अपनी पीड़ा बताई गई, लेकिन इसके बावजूद शासन-प्रशासन गहरी नींद में दिखाई दे रहा है।
जानकारी के अनुसार पुराने आदेशों का हवाला देकर लंबे समय से कार्यरत रसोइयों को बाहर किया जा रहा है। नागरिकों का कहना है कि यह फैसला पूरी तरह अन्यायपूर्ण है और गरीब परिवारों की रोजी-रोटी छीनने जैसा है। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर वर्षों तक सेवा देने वाले रसोइयों को अचानक बेरोजगार करने की जरूरत क्यों पड़ गई?
स्थानीय लोगों का कहना है कि स्कूल खुलने के बाद छात्रों की संख्या बढ़ जाती है, ऐसी स्थिति में पर्याप्त संख्या में रसोइयों का होना बेहद जरूरी है। यदि रसोइयों की संख्या घटाई गई तो मध्यान भोजन कार्यक्रम की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा सकती है और इसका सीधा असर बच्चों के भोजन पर पड़ेगा।
नागरिकों और रसोईया संघ की मांग है कि जिन रसोइयों को हटाया गया है, उन्हें तत्काल इस शिक्षा सत्र में पुनः कार्य पर रखा जाए। उनका कहना है कि सरकार गरीब रसोइयों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बंद करे और संवेदनहीन रवैया छोड़कर तत्काल निर्णय वापस ले।
सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि इस गंभीर मुद्दे पर न जनप्रतिनिधि खुलकर सामने आ रहे हैं और न ही प्रशासन कोई ठोस पहल करता दिखाई दे रहा है। जवाबदारों की चुप्पी ने रसोइयों के आक्रोश को और बढ़ा दिया है। सरकार के इस फैसले से रसोइयों में भारी नाराजगी है और वे साफ कह रहे हैं कि किसी भी कीमत पर रोजगार छीनने की कार्रवाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
