सूखी धरती में जीवन की सरगम: दक्षिण पन्ना की झिरियाओं में फिर लौटी जैवविविधता

Revanchal
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जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत रैपुरा रेंज की रामडोल एवं दाने बाबा झिरिया बनीं पक्षियों, मधुमक्खियों और वन्यजीवों का सुरक्षित आश्रय

दक्षिण पन्ना वनमंडल की रैपुरा रेंज अंतर्गत भरतला बीट में स्थित रामडोल की झिरिया एवं दाने बाबा की झिरिया में जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत प्राकृतिक झिरियाओं का पुनर्जीवन, साफ़ सफाई एवं मरम्मत कार्य कराया गया। वन रक्षक एवं बीट प्रभारी श्री रजनीश चौरसिया द्वारा किए गए संरक्षण एवं सुधार कार्यों के परिणामस्वरूप इन प्राकृतिक जलस्रोतों में गर्मी के मौसम में भी जल उपलब्ध बना हुआ है, जिससे क्षेत्र में जैवविविधता को नया सहारा मिला है।

झिरियाओं के आसपास मधुमक्खियों के बड़ी संख्या में प्राकृतिक छत्ते, विभिन्न पक्षियों के घोंसले एवं वन्यजीवों की सक्रिय उपस्थिति दर्ज की गई है। क्षेत्र में दूधराज (Asian Paradise Flycatcher), ब्लैक-नैप्ड मोनार्क, किंगफिशर, बाज, उल्लू, मोर, हरियल तथा जंगली मुर्गा सहित अनेक पक्षी प्रजातियाँ देखी गईं। कई पक्षियों के घोंसले एवं अंडे भी पाए गए, जो इस क्षेत्र के सुरक्षित एवं अनुकूल प्राकृतिक आवास होने का संकेत हैं।

स्थानीय ग्रामीणों एवं वन अमले के अनुसार, पहले गर्मियों में सूखने वाली कई झिरियाओं में वन विभाग के प्रयासों से इस वर्ष लंबे समय तक पानी बना हुआ है। इन जलस्रोतों से न केवल वन्यजीवों एवं पक्षियों को राहत मिल रही है, बल्कि मधुमक्खियों, तितलियों एवं अन्य छोटे जीवों के लिए भी यह क्षेत्र महत्वपूर्ण पारिस्थितिक आश्रय बनता जा रहा है। जल संरक्षण एवं जैवविविधता संरक्षण का यह समन्वित प्रयास दक्षिण पन्ना वनमंडल में प्राकृतिक संरक्षण मॉडल के रूप में उभर रहा है।

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