मुख्य सचिव के सख्त निर्देशों के बाद भी खनिज विभाग मूकदर्शक? अवैध खनन, ब्लास्टिंग और क्रेशरों की वैधता पर उठे सवाल

Revanchal
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रेवांचल टाइम्स मंडला – प्रदेश के मुख्य सचिव द्वारा जनसुनवाई और सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों के त्वरित एवं प्रभावी निराकरण को लेकर सख्त निर्देश दिए जाने के बावजूद मंडला जिले में खनिज विभाग की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। क्षेत्र में अवैध रेत उत्खनन, अवैध क्रेशर संचालन, मुर्रम एवं मिट्टी के उत्खनन तथा प्रतिबंधित ब्लास्टिंग की शिकायतों के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं होने से लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।


जानकारी के अनुसार हाल ही में कलेक्टरों और संभागायुक्तों के साथ आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान मुख्य सचिव ने जनसुनवाई एवं सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों को गंभीरता से लेने के निर्देश दिए थे। उन्होंने स्पष्ट कहा था कि शिकायतकर्ताओं को हताशा या आत्मदाह जैसे कदम उठाने की स्थिति में पहुंचने देना सुशासन की भावना के विपरीत है। इसके बावजूद मंडला जिले में खनिज संबंधी शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के आरोप लग रहे हैं।


स्थानीय लोगों का कहना है कि जिले में कई स्थानों पर रेत खनन, क्रेशर संचालन और मुर्रम-मिट्टी के उत्खनन की गतिविधियां लगातार संचालित हो रही हैं, लेकिन खनिज विभाग द्वारा प्रभावी कार्रवाई देखने को नहीं मिल रही। इससे यह सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर शिकायतों के बावजूद कार्रवाई में देरी क्यों हो रही है।


वहीं पर्यावरण और जलीय जीवों के संरक्षण को लेकर भी चिंता व्यक्त की जा रही है। आरोप है कि कुछ क्षेत्रों में खनन गतिविधियों के दौरान अवैध ब्लास्टिंग की जा रही है, जबकि सामान्य खनन अनुमति का अर्थ विस्फोटक गतिविधियों की खुली छूट नहीं होता। विशेषज्ञों का मानना है कि अनियंत्रित ब्लास्टिंग से जल स्रोतों, जलीय जीवों तथा आसपास के पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।


इसके साथ ही जिले में संचालित क्रेशरों की वैधता और उनके संचालन संबंधी नियमों के पालन को लेकर भी प्रश्न उठ रहे हैं। स्थानीय नागरिकों की मांग है कि प्रशासन द्वारा क्रेशरों के लाइसेंस, पर्यावरणीय स्वीकृतियों तथा संचालन की शर्तों की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
क्षेत्र के लोगों का कहना है कि यदि शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होती है तो इससे विभाग की कार्यप्रणाली पर संदेह उत्पन्न होता है। हालांकि विभागीय मिलीभगत के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन लगातार उठ रही शिकायतों के कारण प्रशासन से पारदर्शी जांच और स्पष्ट कार्रवाई की अपेक्षा की जा रही है।


अब देखना यह होगा कि मुख्य सचिव के निर्देशों के बाद जिला प्रशासन और खनिज विभाग अवैध खनन, प्रतिबंधित ब्लास्टिंग तथा क्रेशरों की वैधता से जुड़े मामलों में क्या कदम उठाते हैं और जनता की शिकायतों का किस प्रकार समाधान करते हैं।

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