स्मार्ट मीटर या स्मार्ट डकैती? लाखों के बिल, बंद मीटर, उजड़े घर – जनता त्रस्त, अफसर मस्त तकनीकी गड़बड़ी या सुनियोजित लूट? स्मार्ट मीटर सिस्टम पर उठे बड़े सवाल
दैनिक रेवांचल टाइम्स जबलपुर
एक ओर सरकार डिजिटल और स्मार्ट इंडिया की ओर बढ़ने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर जबलपुर जैसे शहर में ‘स्मार्ट मीटर’ आमजन के लिए सिरदर्द बन गए हैं। बिजली उपभोक्ताओं के घरों में इन मीटरों के लगने के बाद न केवल बिलों की राशि बेतहाशा बढ़ी है, बल्कि कई परिवारों का आर्थिक संतुलन पूरी तरह से बिगड़ गया है।
बंद मीटर, चालू बिल: तकनीक की कैसी चालबाज़ी?
कई उपभोक्ताओं का आरोप है कि जिन घरों में महीनों से मीटर बंद हैं, वहां भी हज़ारों और लाखों रुपये तक के बिजली बिल भेजे जा रहे हैं। कुछ ऐसे भी उदाहरण सामने आए हैं, जहां किसी घर में सिर्फ दो बल्ब जल रहे हैं, लेकिन 10,000 रुपये का बिल थमा दिया गया है, जबकि किसी बंगले में सैकड़ों बल्ब और उपकरणों के बावजूद मामूली बिल आ रहा है।
स्मार्ट मीटर: डेटा में गड़बड़ी या जानबूझकर ठगी?
विशेषज्ञों और तकनीकी कर्मियों की मानें तो कई मामलों में डेटा ट्रांसमिशन और रीडिंग में भारी गड़बड़ी देखी गई है। लेकिन सवाल उठता है – अगर ये गड़बड़ी है तो क्यों सिर्फ गरीब और मध्यमवर्गीय लोगों को ही निशाना बना रही है?

जनता में उबाल: रोज़ाना हो रहा मीटरकर्मियों से विवाद
स्थिति इतनी बिगड़ चुकी है कि बिजली विभाग के मीटर रीडर और लाइनमैन जब किसी मोहल्ले में पहुंचते हैं तो जनता का गुस्सा फूट पड़ता है। बहसबाज़ी, गर्मा-गर्मी और कई बार हाथापाई की नौबत आ जाती है। लोगों का कहना है कि जब शिकायत लेकर विभाग के दफ्तर जाते हैं तो या तो कोई सुनता नहीं, या कर्मचारी यह कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं कि “सिस्टम ऑटोमैटिक है।”

“स्मार्ट मीटर नहीं, स्मार्ट लूट सिस्टम है ये” – पीड़ितों की आवाज़
जबलपुर के कई कॉलोनियों से एक जैसी शिकायतें सामने आई हैं –
“हमारे घर में सिर्फ एक पंखा, एक बल्ब चलता है, फिर भी हर महीने 7 से 8 हजार का बिल आ रहा है!”
“पिछले महीने रीडिंग लाखों में दिखा दी गई, जबकि हम दो हफ्ते बाहर थे!”
“बिल न भरने पर बिना चेतावनी कनेक्शन काट दिया गया!”
शासन-प्रशासन की चुप्पी: आखिर कौन है जवाबदेह?

जनता का आरोप है कि शासन को इस समस्या की जानकारी होने के बावजूद न कोई जांच बैठी, न कोई स्पष्ट निर्देश आए। बिजली विभाग के आला अधिकारी चुप्पी साधे बैठे हैं, जबकि आम लोग कर्ज लेकर बिजली बिल भरने पर मजबूर हैं।
जनता की मांग:
- स्मार्ट मीटर की तकनीकी जांच हो
- त्रुटिपूर्ण बिलों की तुरंत सुधार प्रक्रिया बने
- बिजली बिलों की पारदर्शी ऑडिट कराई जाए
- जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो

अगर स्मार्ट मीटर जनता के जीवन को बेहतर बनाने के बजाय उन्हें आर्थिक और मानसिक संकट में डाल रहे हैं, तो यह तकनीकी उन्नति नहीं बल्कि स्मार्ट लूट है। शासन और बिजली विभाग को तुरंत इस दिशा में कठोर कदम उठाने की ज़रूरत है, वरना आने वाले दिनों में यह जनआंदोलन का रूप ले सकता है।
