नैनपुर डायलिसिस की सुविधा का कितने बार काटेंगे फीता नेता, जनता को झूठा दिलासा दे रहे बीएमओ साहब

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How many times will the politicians cut the ribbon for the Nainpur dialysis facility? The BMO is giving false assurances to the public.

नैनपुर में डायलिसिस सुविधा का अभाव कब मिलेगा हक़ और कब खत्म होगा इंतज़ार?

रेवांचल टाइम्स – मंडला जिले का एक प्रमुख कस्बा नैनपुर, जो कभी एशिया का सबसे बड़ा नैरोगेज जंक्शन होने का गौरव रखता था, आज भी अपने बुनियादी अधिकारों और मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है। विशेषकर स्वास्थ्य सुविधाओं की बात करें, तो हालात बेहद चिंताजनक हैं। नैनपुर में डायलिसिस मशीन की कमी को देखते हुये समाज सेवी रोटरी क्लब विवेक तन्खा जो कि कांग्रेस पार्टी के नेता है इनके द्वारा नैनपुर में एक एम्बुलेंस और डायलेसिस मशीन जो किडनी के मरीजों के लिए जीवन दायनी है

जो पिछले महीने प्रदाय की गई चुकी डायलिसिस मशीन के दो पार्ट होते है मतलब यूनिट चालू करने के लिये एक पार्ट की और आवश्यकता थी नैनपुर की जनता ने मांग की जिसे देखते हुये दूसरा पार्ट केबिनेट मंत्री सम्पतिया उइके ने जन हितैषी मांग को देखते हुए जिला चिकित्सालय मंडला से डायलिसिस मशीन को भिजवाया गया परन्तु महीने बीत जाने के बाद भी मशीन चालू नही की गई ।आज अस्पतालों में धूल खा रही हैं। रख-रखाव और विशेषज्ञ डॉक्टरो के अभाव में ये मशीनें आखिर कब तक बंद रहेगी।और नैनपुर वासियों को डायलिसिस की सुविधा कब मिलेगी? और क्या उन्हें इस बुनियादी स्वास्थ्य सुविधा के लिए और कितने दिनों तक इंतजार करना होगा?

स्वास्थ्य सेवाएं सिर्फ कागज़ों तक सीमित

नैनपुर की स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत सरकारी रिपोर्ट्स और कागज़ों में दिखाई गई तस्वीर से बिल्कुल अलग है। शासन और प्रशासन द्वारा तमाम योजनाएं चलाए जाने के बावजूद यहां पर चिकित्सकों की कमी, दवाओं की अनुपलब्धता और आवश्यक मेडिकल उपकरणों के अभाव जैसी समस्याएं बनी हुई हैं। अस्पतालों में न डॉक्टर समय पर मिलते हैं और न ही मरीजों को ज़रूरी इलाज। कई बार तो मरीजों को गंभीर स्थिति में जबलपुर या नागपुर जैसे बड़े शहरों की ओर रुख करना पड़ता है, जिससे आर्थिक और मानसिक बोझ भी बढ़ता है।
डायलिसिस मरीजों की पीड़ा
नैनपुर और आसपास क्षेत्र के कई मरीज ऐसे हैं जिन्हें किडनी संबंधी बीमारियों के कारण नियमित डायलिसिस की आवश्यकता होती है। लेकिन स्थानीय स्तर पर डायलिसिस की सुविधा न होने के कारण ये मरीज लंबी दूरी तय कर मंडला या जबलपुर जाते हैं या महंगे निजी अस्पतालों में इलाज करवाने को मजबूर हैं। यह न केवल आर्थिक रूप से बोझिल है, बल्कि समय और संसाधनों की भी भारी बर्बादी है। गरीब और आदिवासी परिवार, जो पहले ही आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं, उनके लिए यह स्थिति जानलेवा साबित हो रही है।
लाखों की मशीनें, लेकिन कोई इस्तेमाल नहीं

नैनपुर के हॉस्पिटल की शो पीस बनी डायलिसिस मशीन चालू करने के नाम पर अधिकारी जनता को भटका रहे।

नैनपुर में डायलिसिस मशीनें लाकर रख दी गईं, लेकिन उनके संचालन के लिए न तो टेक्नीशियन हैं, न ही नेफ्रोलॉजिस्ट (किडनी स्पेशलिस्ट)। मशीनें अस्पतालों में यूं ही धूल खा रही हैं। रख-रखाव के अभाव में उनकी हालत भी खराब होती जा रही है। एक ओर जहां सरकार लाखों रुपये खर्च कर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर ये सुविधाएं सिर्फ “शोपीस” बनकर रह गई हैं।

प्रशासनिक उदासीनता या लापरवाही?

जब यह पूछा जाता है कि आखिर सुविधा शुरू क्यों नहीं हो रही, तो अधिकारियों के पास केवल बहाने होते हैं अभी टेक्नीशियन की नियुक्ति नहीं हुई,ऐसा प्रतीत होता है कि प्रशासनिक अमला केवल कागज़ों में काम दिखाकर “सब ठीक है” की रिपोर्ट भेज रहा है, जबकि जमीनी सच्चाई बिल्कुल विपरीत है। कई बार जनप्रतिनिधियों द्वारा सवाल उठाने के बावजूद भी स्थानीय स्वास्थ्य विभाग की नींद नहीं टूटती। सरकार की योजनाएं और जमीनी हकीकत में फासला


प्रधानमंत्री स्वास्थ्य योजना, मुख्यमंत्री संजीवनी योजना, आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं के तहत जहां गरीबों को मुफ्त इलाज देने की बात की जा रही है, वहीं नैनपुर जैसे क्षेत्र इन योजनाओं के लाभ से वंचित नजर आते हैं। डायलिसिस जैसी सुविधा का अभाव साफ दर्शाता है कि कैसे सिस्टम आदिवासी और ग्रामीण इलाकों को नजरअंदाज कर रहा है। ये योजनाएं सिर्फ प्रचार में अच्छी लगती हैं, लेकिन जब ज़रूरत होती है, तब असली चेहरा सामने आता है।

आदिवासी बाहुल्य जिला विकास से अब भी कोसों दूर

मंडला जिला, जो कि आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र है, लंबे समय से उपेक्षा का शिकार रहा है। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाएं यहां अभी भी विकसित नहीं हो पाई हैं। सरकारें बदलती रहीं, नारे बदलते रहे लेकिन हालात जस के तस बने रहे। नैनपुर, जो मंडला जिले का प्रमुख कस्बा है, वही अगर सुविधाओं के लिए तरस रहा है तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि दूरदराज के गांवों की स्थिति क्या होगी।

इनका कहना है कि
एक सप्ताह में चालू हो जायेगी अपेक्स कंपनी को ठेका दिया गया है
मशीन हेतु मानव संसाधन की तीन लोगों की भर्ती की गई है शीघ्र ही नैनपुर में मरीजों को डायलिसिस की सुविधाएं उपलब्ध होगी।
डॉक्टर राजीव चावला
खंड चिकित्सा अधिकारी नैनपुर मंडला

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