मंत्री के गृह जिले मंडला में शिक्षा विभाग बना भ्रष्टाचार का अड्डा! रिश्वतखोर अधिकारी अब भी पद पर सक्रिय

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The education department in the minister's home district of Mandla has become a hotbed of corruption! Bribe-taking officials remain active in their posts.

रेवांचल टाईम्स – मंडला,जिले की विधायक और मध्यप्रदेश की कैबिनेट मंत्री सम्पतिया उइके के गृह जिला मंडला अब धीरे धीरे भ्रष्टाचार और भ्रस्टो का चरागाह बनते जा रहा है, और जिले में काननू व्यवस्था चौपट ही चुकी है अधिकारी बेलागम हो चुके आज हर सरकारी दफ़्तर में बिना रिश्वत खिलाये आम जन के कोई कार्य आसानी से नही हो रहे है और जिला प्रशासन मूक दर्शक बन के सब चुप चाप देख रहे हैं कार्यवाही के नाम पर केवल खाना पूर्ति की जा रही हैं।

वही शिक्षा विभाग एक बार फिर चर्चाओं में है। जहाँ पर विभाग के भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के मामले लगातार सामने आने के बावजूद कार्रवाई के नाम पर केवल दिखावा किया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, जिन अधिकारियों को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया था, वे आज भी AC (जिला शिक्षा कार्यालय) से जुड़े कार्यों में सक्रिय देखे जा रहे हैं। यह सवाल खड़ा करता है कि क्या भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने की कोशिश की जा रही है, या फिर यह सब मंत्री के संरक्षण में चल रहा “खुला व्यवसाय” बन चुका है? जिले में पिछले दिनों ही EOW की टीम ने जिला प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर (DPC) अरविंद विश्वकर्मा और उनकी पत्नी को ₹60,000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा था इससे पहले, जबलपुर लोकायुक्त की टीम ने जनजातीय कार्य विभाग के सहायक यंत्री नरेन्द्र गुप्ता को ₹20,000 की रिश्वत लेते पकड़ा था।

The education department in the minister's home district of Mandla has become a hotbed of corruption! Bribe-taking officials remain active in their posts.
The education department in the minister’s home district of Mandla has become a hotbed of corruption! Bribe-taking officials remain active in their posts.

जिसने पूरे जिले में हड़कंप मचा दिया। आरोपियो के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है । इसके बावजूद, दोनों मामलों में कार्रवाई केवल कागज़ों में सीमित दिखाई दे रही है। सूत्रों के अनुसार, “रिश्वत लेते पकड़े गए अधिकारी अब भी जिला शिक्षा कार्यालय (AC ऑफिस) से अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए हैं। वे बैठकों और फाइलों में दखल देते देखे जा रहे हैं।” स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि जिले में शिक्षा का काम अब कारोबार बन चुका है स्थानांतरण, नियुक्ति और बिल पास करने के लिए तय दरें चल रही हैं। जनता का कहना है कि “जब मंत्री का गृह जिला ही भ्रष्टाचार का केंद्र बनेगा, तो प्रदेश में सुधार की उम्मीद कैसे की जा सकती है। ” अब सवाल यह है कि —क्या मंत्री सम्पतिया उइके इन भ्रष्ट अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई करवाएँगी या फिर मंडला की शिक्षा व्यवस्था इसी तरह भ्रष्टाचार की गिरफ्त में रहेगी? वही जिले के प्रभारी मंत्री प्रदीप जयसवाल भी मौन है, स्वयं के प्रभार जिले में भ्रष्टाचार की लगातार बढ़ती घटना और प्रशासनिक अनियमितताओं और रिश्वतखोरी के मामलों के सामने आने के बावजूद अब तक मंत्री की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
मंडला जिले में भ्रष्टाचार की परतें खुलती जा रही हैं, लेकिन जिले के प्रभारी मंत्री अब तक चुप्पी साधे हुए हैं। जनता सवाल कर रही है आखिर कब टूटेगी यह चुप्पी?

वही गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एवं जिला शिक्षा स्थाई समिति के अध्यक्ष मंडला ने कहा —“शिक्षा व्यवस्था फिलहाल पूरी तरह चौपट हो गई है। आए दिन भ्रष्ट अधिकारियों का बोलबाला बढ़ता जा रहा है। शिक्षा के दफ्तरों में खुलेआम भ्रष्टाचार का खेल चल रहा है, जिससे न तो विद्यार्थियों को लाभ मिल रहा है और न ही शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हो रहा है।”

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