छिंदवाड़ा के युवा स्वयंसेवकों का 125 KM साहसिक ‘संघ संकल्प’ सफर!

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125 KM adventurous 'Sangh Sankalp' journey of young volunteers of Chhindwara!

​रेवांचल टाइम्स छिंदवाड़ा

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के आगामी शताब्दी वर्ष के अवसर पर, मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा से 127 उत्साही युवा स्वयंसेवकों ने एक अभूतपूर्व और साहसिक मिशन को अंजाम दिया है। इन स्वयंसेवकों ने महाविद्यालय कार्य विभाग के बैनर तले, संघ के उद्गम स्थल नागपुर स्थित रेशिम बाग कार्यालय तक पहुंचने के लिए 125 किलोमीटर की दूरी साइकिल से तय की। यह यात्रा मात्र शारीरिक endurance की नहीं, बल्कि एक गहरे वैचारिक संकल्प की प्रतीक बन गई है।


​ ‘ऑपरेशन साइकिल यात्रा’: दो दिवसीय रूट का खुलासा
​गुप्त सूत्रों से पता चला है कि यह दो दिवसीय साइकिल यात्रा छिंदवाड़ा से शुरू हुई और रामाकोना, सौसर, बोरगांव और सावनेर जैसे महत्वपूर्ण पड़ावों से गुजरते हुए नागपुर पहुँची। 127 युवा स्वयंसेवकों का यह जत्था, जो कि संघ के भविष्य की पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करता है, भीषण गर्मी और थकान को धता बताते हुए अपने गंतव्य तक पहुँचा।

125 KM adventurous 'Sangh Sankalp' journey of young volunteers of Chhindwara!
125 KM adventurous ‘Sangh Sankalp’ journey of young volunteers of Chhindwara!


​ ऐतिहासिक ठिकानों पर ‘गहन पड़ताल’
​नागपुर पहुँचने के बाद, स्वयंसेवकों ने तुरंत अपनी ‘पड़ताल’ शुरू कर दी:
​संस्थापक स्मृति स्थल: सबसे पहले, वे रेशिम बाग स्थित डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार (संस्थापक, RSS) के स्मृति स्थल पर पहुँचे। यहाँ उन्होंने डॉ. हेडगेवार और गोलवलकर गुरुजी की समाधि स्थल के दर्शन किए।
​प्रथम कार्यालय: इसके बाद, जत्था महल स्थित उस ऐतिहासिक निवास स्थान और संघ के प्रथम कार्यालय (जहाँ पहली बार संघ की शाखा लगी थी) पहुँचा। यह स्थल संघ के वैचारिक मूल को दर्शाता है।

125 KM adventurous 'Sangh Sankalp' journey of young volunteers of Chhindwara!
125 KM adventurous ‘Sangh Sankalp’ journey of young volunteers of Chhindwara!

​ मिशन ‘पंच परिवर्तन’ का लिया गया संकल्प

इन ऐतिहासिक स्थलों के दर्शन के बाद, सभी 127 युवा स्वयंसेवकों ने एक बड़ा संकल्प लिया। उन्होंने तय किया है कि संघ के 101वें वर्ष में प्रवेश के उपलक्ष्य में, वे प्रत्येक हिंदू घर तक पहुँचकर ‘पंच परिवर्तन’ के विषय और संघ के विचारों को जन-जन तक पहुँचाएँगे। यह संकल्प दर्शाता है कि यह साइकिल यात्रा केवल एक शारीरिक उपलब्धि नहीं, बल्कि विचारधारा के विस्तार का एक प्रारंभिक चरण है।
​ निष्कर्ष: भारत माता की आरती के साथ मिशन पूरा
​इस साहसिक और संकल्प से भरी यात्रा का समापन, नागपुर में भारत माता की आरती के साथ हुआ। यह घटना राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की युवा शक्ति, समर्पण और आने वाले शताब्दी वर्ष के लिए उनके मजबूत इरादों को स्पष्ट रूप से उजागर करती है। यह साहसिक सफर युवा स्वयंसेवकों की अटूट निष्ठा और राष्ट्र-निर्माण के प्रति उनके समर्पण का सबसे बड़ा प्रमाण है।

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