रेलवे हॉस्पिटल में सतर्कता शिविर: डॉ. कुर्रे ने सिखाया जीवन रक्षक CPR, सांप काटने और मिर्गी से जुड़ी भ्रांतियों को किया दूर

Revanchal
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​दैनिक रेवांचल टाईम्‍स नरसिंहपुर। रेलवे प्रशासन द्वारा रेल कर्मचारियों और उनके परिजनों की सुरक्षा व स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता लाने के उद्देश्य से सोमवार, 9 फरवरी 2026 को रेलवे हॉस्पिटल नरसिंहपुर में एक दिवसीय ‘सतर्कता एवं सुरक्षा शिविर’ का सफल आयोजन किया गया। इस शिविर में रेलवे के उच्चाधिकारियों ने सुरक्षा नियमों की जानकारी दी, वहीं चिकित्सा विशेषज्ञों ने आपातकालीन स्थिति में जान बचाने के गुर सिखाए।

​सुरक्षा ही सर्वोपरि: अधिकारियों ने दिए निर्देश:-

​शिविर के दौरान मुख्य अतिथि और वरिष्ठ अधिकारियों में सौरभ कुमार एवं मिस्टर तिवारी ने सुरक्षा से संबंधित महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि कार्यस्थल और रेल परिसर में सतर्कता बरतकर कैसे बड़ी दुर्घटनाओं को टाला जा सकता है।

​CPR: जीवन बचाने की संजीवनी

​रेलवे चिकित्सक डॉ. आर. आर. कुर्रे ने ‘फर्स्ट एड ट्रेनिंग’ (प्राथमिक चिकित्सा) के अंतर्गत CPR (Cardiopulmonary Resuscitation) विधि का जीवंत प्रदर्शन (Demo) किया। डॉ. कुर्रे ने बताया कि: दिल का दौरा पड़ने या सांस रुकने पर सीपीआर किसी भी व्यक्ति के लिए जीवनदान साबित हो सकता है। हर आम नागरिक को यह विधि पता होनी चाहिए।
​बच्चों और बड़ों में अंतर: बच्चों और वयस्कों को सीपीआर देने का तरीका अलग-अलग होता है, जिसे उन्होंने बारीकी से समझाया।
​आपात स्थितियां: पानी में डूबने, इलेक्ट्रिक शॉक लगने या दम घुटने जैसी स्थितियों में सीपीआर कैसे जान बचा सकता है, इसका डेमो दिया गया।

​अंधविश्वास और भ्रांतियों पर प्रहार:-

​डॉ. कुर्रे ने समाज में व्याप्त कई गलत धारणाओं को वैज्ञानिक तथ्यों के साथ दूर किया:
मिर्गी का दौरा आने पर जूता सुंघाने जैसी भ्रांति को सिरे से खारिज करते हुए उन्होंने इसे पूरी तरह गलत बताया। उन्होंने जोर दिया कि मरीज को केवल चिकित्सकीय उपचार की जरूरत होती है।

​सर्पदंश:- सांप के काटने पर झाड़-फूँक के चक्कर में समय बर्बाद न करने की सलाह दी गई। डॉ. कुर्रे ने बताया कि इसका एकमात्र इलाज ‘एंटी स्नेक वेनम’ (ASV) है, जो अस्पतालों में उपलब्ध रहता है।

​इन अधिकारियों की रही गरिमामयी उपस्थिति:-

​कार्यक्रम में रेलवे के विभिन्न विभागों के प्रमुख विशेष रूप से उपस्थित रहे, जिनमें एडीएन सुनील जाट, आईओडब्ल्यू मनोज कुमार, पंकज जी और मालवीय जी शामिल थे। शिविर के अंत में सभी का आभार प्रदर्शन एडीएन मनोज कुमार द्वारा किया गया।
​”चिकित्सा विज्ञान में समय ही जीवन है। यदि हम भ्रांतियों को छोड़कर सही समय पर प्राथमिक उपचार और डॉक्टरी मदद लें, तो अधिकांश मौतों को रोका जा सकता है।”

— डॉ. आर. आर. कुर्रे

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