लखनवाड़ा घाट बना चर्चा का केंद्र, कम लागत में मजबूत निर्माण देखकर लोगों ने की सराहना, महंगे निर्माणों की गुणवत्ता पर सवाल
दैनिक रेवांचल टाइम्स सिवनी – वैनगंगा नदी के लखनवाड़ा घाट पर ग्राम पंचायत की इच्छाशक्ति और स्थानीय लोगों के सहयोग से तैयार किया गया घाट इन दिनों क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। महज लगभग 5 से 5.5 लाख रुपये की लागत से निर्मित यह घाट न केवल मजबूती के लिए सराहा जा रहा है, बल्कि इसकी निर्माण तकनीक और टिकाऊपन ने अन्य विकास कार्यों की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
कम लागत, लेकिन मजबूत निर्माण बना उदाहरण
स्थानीय लोगों के अनुसार इस घाट का निर्माण सीमित बजट में किया गया, लेकिन इसमें मजबूती और सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा गया है। निर्माण में लोहे की संरचना और ठोस आधार का उपयोग किया गया, जिससे यह घाट न केवल टिकाऊ दिखता है बल्कि उपयोग के लिहाज से भी सुरक्षित माना जा रहा है।
घाट का निरीक्षण करने पहुंचे आसपास के गांवों के लोगों ने भी इसकी गुणवत्ता की सराहना की और इसे एक “मिसाल” बताया।
25-25 लाख के घाटों पर सवाल
इसी बीच क्षेत्र में पहले बने कई अन्य घाटों को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि कुछ स्थानों पर 20 से 25 लाख रुपये की लागत से बने घाट निर्माण के कुछ ही महीनों में दरारें और टूट-फूट की स्थिति में पहुंच गए हैं।
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि भारी लागत के बावजूद कई निर्माणों में गुणवत्ता की अनदेखी की गई, जिससे सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका भी जताई जा रही है।
जमीनी हकीकत ने खोली व्यवस्था की पोल
लखनवाड़ा घाट का उदाहरण अब ग्रामीण विकास कार्यों की तुलना का आधार बन गया है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब कम बजट में मजबूत और उपयोगी निर्माण संभव है, तो अधिक लागत वाले कार्यों में गुणवत्ता क्यों नहीं दिखती?
ग्रामीणों का कहना है कि यदि सही निगरानी और पारदर्शिता रखी जाए तो सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक रूप से जनता तक पहुंच सकता है।
प्रशासन से जांच की मांग
घाट निर्माण को लेकर उठ रहे सवालों के बीच लोगों ने प्रशासन से उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। साथ ही यह भी आग्रह किया गया है कि भविष्य में सभी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की सख्त मॉनिटरिंग की जाए, ताकि विकास कार्य केवल कागजों में नहीं बल्कि जमीन पर भी टिकाऊ साबित हों।
निष्कर्ष
लखनवाड़ा का यह घाट अब केवल एक निर्माण नहीं, बल्कि बेहतर योजना और ईमानदार क्रियान्वयन का उदाहरण बनकर उभरा है। वहीं दूसरी ओर, यह मामला विकास कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने की जरूरत को भी उजागर करता है।
