“मेहंदवानी विकासखंड की पंचायतों में लगातार भ्रष्टाचार का खेल? फर्जी बिल, मास्टर रोल और भुगतान पर उठे सवाल

Revanchal
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ठेकेदार–सरपंच–सचिव गठजोड़ के आरोपों से गरमाई सियासत, जांच के नाम पर खानापूर्ति से ग्रामीणों में आक्रोश

दैनिक रेवांचल टाइम्स डिंडौरी/जनपद पंचायत मेहंदवानी एक बार फिर ग्राम पंचायतों में कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर सवालों के घेरे में है। क्षेत्र के ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि कुछ ग्राम पंचायतों में ठेकेदार, सरपंच, सचिव और उपयंत्रियों की कथित मिलीभगत से सरकारी राशि का बंदरबांट किया जा रहा है। फर्जी बिलों के आधार पर भुगतान, मास्टर रोल में हेराफेरी और नियमों को ताक पर रखकर किए गए वित्तीय लेनदेन ने पंचायत व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हम बात कर रहे हैं ग्राम पंचायत कनेरी की जहां पर सरपंच सचिव उपयंत्री एवं मां नर्मदा मटेरियल सप्लायर ठेकेदार की जहां पर उनके द्वारा सारसडोली से ग्राम पंचायत कनेरी जिसकी दूरी लगभग 15 से 20 किलोमीटर है जहां पर टैंकर से पानी सप्लाई के नाम पर 49 हजार 500 रूपया का मां नर्मदा मटेरियल सप्लायर के नाम से फर्जी भुगतान किया गया है जब इस विषय में ग्राम पंचायत के सचिव से संपर्क किया गया तो उनके द्वारा गोल-मोल जवाब दिया गया और फोन काट दिया गया जिसके बाद उन्होंने कुछ भी इस मामले में बताना उचित नहीं समझा इससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि कनेरी ग्राम पंचायत में भ्रष्टाचार की होली जमकर खेली जा रही है सरपंच सचिव उपयंत्री और ठेकेदार अपनी जेब गर्म करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं और तो मजे की बात यह है कि अनेक ग्राम पंचायत की खबर प्रकाशित करने के बावजूद भी जनपद के मुख्य कार्यपालन अधिकारी के द्वारा किसी भी प्रकार की कार्यवाही न करना सवालों के घेरे में नजर आती है क्या जनपद में बैठे मुख्य कार्यपालन अधिकारी का ग्राम पंचायत के सरपंच सचिव उपयंत्री एवं ठेकेदार को खुला संरक्षण मिल रहा है यह तो अपने आप में एक अहम सवाल है एक और हमारी सरकार विकास कार्यों के लिए करोड़ों अरबो रुपए खर्च कर रही है इसके बावजूद भी जिम्मेदार पद में बैठे अधिकारियों कर्मचारियों द्वारा लगातार भ्रष्टाचार करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं मां नर्मदा मटेरियल सप्लायर ठेकेदार हमेशा से ही विवादों में घिरे रहे हैं उनकी खबर कई बार अख़बारों में प्रमुखता से प्रकाशित की गई है इसके बावजूद भी प्रशासन द्वारा किसी भी प्रकार की कोई कार्यवाही न करना अपने आप में एक अहम सवाल है आखिरकार यहां दबंग ठेकेदार को किसका खुला संरक्षण मिल रहा है यहां ठेकेदार की खबर प्रकाशित करने पर लगातार धमकियां भी मिलती है अभी तक यहां ठेकेदार 2 से 3 लोगों को मारने और उठाने की धमकी दे चुके हैं। यहां ठेकेदार सत्ता के नशे में चूर लगातार भ्रष्टाचार को अंजाम दे रहे हैं

ग्रामीणों का आरोप है कि जनपद क्षेत्र की कई पंचायतों में विकास कार्यों के नाम पर लंबे समय से भ्रष्टाचार का खेल चल रहा है, लेकिन शिकायतों और समाचारों के लगातार प्रकाशन के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित हैं। इससे लोगों का प्रशासन पर भरोसा कमजोर होता जा रहा है।

शिकायतकर्ताओं के मुताबिक, कुछ पंचायतों में एक ही मटेरियल सप्लायर के नाम पर संदिग्ध बिल लगाकर लाखों रुपये का भुगतान किया गया है। इतना ही नहीं, मस्टर रोल में ऐसे लोगों के नाम दर्ज कर मजदूरी निकाली गई, जिनका संबंधित पंचायतों में कभी कोई काम ही नहीं था। आरोप यह भी है कि ठेकेदार से जुड़े मजदूरों और उसके ड्राइवर तक के नाम पर अलग-अलग पंचायतों से भुगतान दर्शाया गया है। एवं कुछ ऐसे मजदूर भी है ठेकेदार के जहां मृत मजदूर के नाम से भी ग्राम पंचायत में भुगतान किया गया है सूत्र कहते है

ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम पंचायत डोकरघाट, दुलहरी, फुलवाही, सारसडोली समेत अन्य पंचायतों में भी इस तरह की शिकायतें सामने आई हैं। यदि इन पंचायतों के भुगतान अभिलेख, निर्माण कार्यों के बिल, मस्टर रोल और तकनीकी स्वीकृतियों की निष्पक्ष जांच कराई जाए, तो कई बड़े वित्तीय घोटालों का पर्दा फास हो सकता है सबसे बड़ा सवाल यह है कि पंचायत में होने वाले भुगतान और निर्माण कार्यों की तकनीकी स्वीकृतियां प्रशासनिक निगरानी में होती है इसके बावजूद लगातार अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद भी जिम्मेदार अधिकारियों ने समय रहते ठोस कार्यवाही क्यों नहीं की आखिर किसके संरक्षण में पंचायतों में सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोप लगातार बढ़ते जा रहे हैं ..क्या लगातार भ्रष्टाचार के मामले में जनपद पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रमोद ओझा किसी भी प्रकार की कोई कार्यवाही को अंजाम दे पाएंगे यह तो अपने आप में एक अहम सवाल है।

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