उप संचालक कृषि अशवनी झारिया ने मिट्टी परीक्षण योजना में किया भ्रष्टाचार

Revanchal
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निजी संस्थाओं को ठेका, बिना परीक्षण के भुगतान; सरकारी लैब से हो रहा कार्य, फिर भी प्राइवेट को पैसा

दैनिक रेवाँचल टाईम्स – मंडला।जिले में संचालित स्वाइल हेल्थ कार्ड एवं फर्टिलिटी योजना जो कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक महत्वाकांक्षी योजना है जिसके तहत मृदा नमूना परीक्षण में गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार मृदा नमूनों के विश्लेषण कार्य हेतु अग्रिम राशि जारी की गई थी, जिसमें प्रति नमूना 235 रुपये की दर से भुगतान निर्धारित किया गया था। यह राशि निर्धारित लक्ष्यों की पूर्ति के आधार पर संबंधित निजी संस्थाओं को भुगतान कर दी गई है।


लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आ रही है। घुघरी, निवास और नारायणगंज विकासखंडों में संचालित मिट्टी परीक्षण प्रयोगशालाएं बंद पड़ी हैं। निवास में “प्रगदेव इंटरनेशनल ईपीसी खरगोन”, घुघरी में “आरकेसीटी लेबोरेट्री जबलपुर” तथा नारायणगंज में “सतपुड़ा जैविक प्रोड्यूसर कंपनी खंडवा” को यह कार्य सौंपा गया है।


अशवनी झारिया
प्रभारी उपसंचालक कृषि मण्डला

आरोप है कि इन निजी संस्थाओं द्वारा वास्तविक मृदा परीक्षण किए बिना ही लाखो रुपये का भुगतान किया जा चुका है। वहीं दूसरी ओर निजी कंपनियों को दिए गए मिट्टी परीक्षण का कार्य जिला मुख्यालय स्थित शासकीय प्रयोगशाला में किए जाने की बात सामने आई है, लेकिन भुगतान निजी संस्थाओं के नाम पर दर्शाया जा रहा है। इससे पूरे मामले में वित्तीय अनियमितता और मिलीभगत की आशंका गहरा गई है।


सूत्रों का कहना है कि योजना कागज़ों में ही संचालित हो रही है और वास्तविक कार्य कहीं और से करवाया जा रहा है। इस कथित घोटाले में उप संचालक कृषि अशवनी झारिया की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई करता है या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।
बॉक्स:
जिले के कई कृषि विस्तार अधिकारियों ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि किसानों के खेतों से मिट्टी के नमूने एकत्र करने के लिए शासन द्वारा प्रति नमूना 20 रुपये मेहनताना निर्धारित है।
वही यह गंभीर आरोप है कि इस राशि में से भी 5 रुपये प्रति नमूना कमीशन के रूप में उप संचालक द्वारा मांग लिया जाता हैं, जिससे फील्ड स्तर पर कार्य कर रहे कर्मचारियों में असंतोष व्याप्त है।

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