प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती प्रथा चंद्रोल ने रचा सफलता का इतिहास

Revanchal
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रेवांचल टाइम्स बम्हनी बंजर मंडला क्षेत्र की होनहार छात्रा प्रथा चंद्रोल ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत में ईमानदारी हो, तो किसी भी प्रकार की कमी सफलता के मार्ग में बाधा नहीं बन सकती।

प्रथा चंद्रोल, जो कि कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बम्हनी बंजर की छात्रा हैं, ने माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा घोषित कक्षा 12वीं के बायोलॉजी विज्ञान संकाय के परीक्षा परिणामों में 500 में से 465 अंक प्राप्त कर 93 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं। इस उल्लेखनीय उपलब्धि के साथ उन्होंने न केवल अपने माता-पिता का नाम रोशन किया, बल्कि पूरे बम्हनी बंजर क्षेत्र को गौरवान्वित किया है।

प्रथा की इस सफलता के पीछे उनकी निरंतर मेहनत, लगन और दृढ़ संकल्प का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने अपनी पढ़ाई के प्रति कभी भी लापरवाही नहीं बरती और कठिन परिस्थितियों में भी अपने लक्ष्य से भटकी नहीं। यही कारण है कि आज वे इस मुकाम तक पहुंच पाई हैं।


प्रथा चंद्रोल के पिता वीरेंद्र चंद्रोल माता अर्चना चंद्रोल अपनी बेटी की इस उपलब्धि से अत्यंत प्रसन्न हैं। उन्होंने बताया कि प्रथा बचपन से ही पढ़ाई के प्रति गंभीर रही है और हमेशा बेहतर करने की कोशिश करती रही है। परिवार का सहयोग और प्रोत्साहन भी उसकी सफलता का एक महत्वपूर्ण आधार रहा है।


प्रथा ने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने माता-पिता के आशीर्वाद, विद्यालय के शिक्षकों के मार्गदर्शन और मनीष कोचिंग क्लास के कुशल निर्देशन को दिया है। उनका कहना है कि यदि सही दिशा और मार्गदर्शन मिले, तो कोई भी छात्र बड़ी सफलता प्राप्त कर सकता है।


विद्यालय के प्राचार्य एवं गुरुजनों ने भी प्रथा की इस उपलब्धि पर गर्व व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि प्रथा जैसे छात्रा विद्यालय के लिए प्रेरणा का स्रोत होते हैं। उनके अनुसार, प्रथा ने यह साबित किया है कि कठिन परिश्रम और अनुशासन से किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।


प्रथा की सफलता पर उसके परिजनों, करीबी रिश्तेदारों और विद्यालय के स्टाफ ने भी खुशी जाहिर की है और उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। पूरे क्षेत्र में उसकी उपलब्धि की चर्चा हो रही है और अन्य छात्र भी उससे प्रेरणा ले रहे हैं।


प्रथा चंद्रोल का सपना आगे की पढ़ाई कर चिकित्सा क्षेत्र में अपना करियर बनाना है। वह समाज की सेवा करना चाहती हैं और एक सफल डॉक्टर बनकर लोगों की मदद करना चाहती हैं।


प्रथा की यह सफलता यह संदेश देती है कि यदि मेहनत और दृढ़ संकल्प हो, तो हर बाधा को पार किया जा सकता है। उन्होंने यह साबित कर दिया है कि प्रतिभा कभी भी संसाधनों की मोहताज नहीं होती, बल्कि सही सोच और प्रयास से हर सपना साकार किया जा सकता है।

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