सम्राट अशोक की जयंती मनाने में सरकार की उदासीनता,

Revanchal
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समाज ने खुद संभाली विरासत की जिम्मेदारी

दैनिक रेवांचल टाइम्स मंडला/ इतिहास केवल बीते समय का वर्णन नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य को दिशा देने वाली प्रेरणा होता है। इसी सोच के साथ नैनपुर के सरदार पटेल भवन में विगत दिन महान सम्राट अशोक की जयंती का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने न केवल उनके जीवन पर प्रकाश डाला, बल्कि सरकार की ओर से जयंती को नजरअंदाज किए जाने पर भी चिंता व्यक्त की।

कार्यक्रम की अध्यक्षता अधिवक्ता सी. बी. पटेल ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में विमलेश सोनी (प्रदेश अध्यक्ष, अति पिछड़ा वर्ग मोर्चा) उपस्थित रहे। इस अवसर पर विभिन्न वक्ताओं ने सम्राट अशोक के व्यक्तित्व और उनके शासनकाल की विशेषताओं को विस्तार से रखा।

कुंज बिहारी पटेल ने कहा कि सम्राट अशोक अपने शौर्य और प्रताप के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध थे। उनके शासनकाल में भारत इतना सशक्त था कि कोई भी शत्रु आंख उठाकर देखने का साहस नहीं कर पाता था। वहीं अधिवक्ता संजय चौरसिया ने उन्हें ओबीसी वर्ग से जुड़ा बताते हुए कहा कि अशोक पूरे समाज के लिए प्रेरणा स्रोत हैं और उन्होंने सामाजिक जागरूकता को बढ़ावा दिया।

मुख्य अतिथि विमलेश सोनी ने अपने संबोधन में कहा कि आज देश में “अखंड भारत” की बात तो होती है, लेकिन उसके महान शासक का नाम अक्सर भुला दिया जाता है। उन्होंने कहा कि अशोक स्तंभ आज भी देश की पहचान है और अशोक चक्र राष्ट्रध्वज की शान है, फिर भी सरकारों द्वारा उनकी जयंती को उचित महत्व नहीं दिया जा रहा।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने यह भी कहा कि सम्राट अशोक के जीवन में गौतम बुद्ध से मिली प्रेरणा के बाद बड़ा परिवर्तन आया। कलिंग युद्ध के बाद उन्होंने हिंसा का मार्ग छोड़कर बौद्ध धर्म अपनाया और शांति, करुणा तथा मानवता का संदेश दिया।

जिला अध्यक्ष चंद्रगुप्त नामदेव ने ओबीसी वर्ग की एकता पर जोर देते हुए कहा कि आने वाली जातिगत जनगणना से इस वर्ग के उत्थान का मार्ग प्रशस्त होगा। वहीं अध्यक्षता कर रहे सी. बी. पटेल ने समाज में जागरूकता की आवश्यकता बताते हुए कहा कि केवल दिखावे के बजाय वास्तविक कर्तव्यों को निभाना जरूरी है।

कार्यक्रम के समापन पर गायिका नीतू झारिया ने छत्तीसगढ़ी भाषा में सम्राट अशोक के जीवन पर प्रस्तुति दी, जिसने उपस्थित लोगों को भावुक कर दिया और यह दर्शाया कि क्यों उन्हें “महान” कहा जाता है।

कार्यक्रम में एक स्वर से यह संदेश दिया गया कि महापुरुषों की विरासत को जीवित रखना केवल सरकार की नहीं, बल्कि समाज की भी जिम्मेदारी है। सम्राट अशोक का जीवन आज भी एकता, शांति और सशक्त राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा देता है।

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