लगातार बाघों की मौत को लेकर जिले के पत्रकारों का कलेक्ट्रेट मार्ग में चल रहा धरना प्रदर्शन
दैनिक रेवांचल टाईम्स – मण्डला। जिला मुख्यालय में चल रहे आंदोलन धरना प्रदर्शन को लगातार समर्थन मिल रहा है। धरना प्रदर्शन में अब तक भाजपा जिला अध्यक्ष प्रफुल्ल मिश्रा, निवास जनपद पंचायत उपाध्यक्ष घनश्याम सूर्यवंशी, कांग्रेस जिला अध्यक्ष डॉ अशोक मर्सकोले, जनपद पंचायत मंडला अध्यक्ष संतोष सोनू भलावी, आम आदमी पार्टी जिला अध्यक्ष पंकज सोनी, सामाजिक कार्यकर्ता पीडी खैरवार, पशु प्रेमी निशा ठाकुर, पटवारी संघ जिला अध्यक्ष गीतेन्द्र गीतू बैरागी, बसपा नेता सुरेन्द्र चौधरी सहित तमाम नेताओं ने अपना खुला समर्थन इस धरना प्रदर्शन को दे दिया है।

पांच दिन से चल रहे धरना प्रदर्शन में लगातार समाजसेवी और जनप्रतिनिधियों का आना जाना लगा रहता है जो कहीं न कहीं से कान्हा प्रबंधन पर आक्रोश भी प्रकट करते हैं सभी लोगों का मत है कि कान्हा नेशनल पार्क जिले की आमूल्य धरोहर है जिसे हर हाल में संरक्षित और सुरक्षित रखना हम सभी की जबावदेही है।
खासकर कान्हा प्रबंधन के डिप्टी डॉरेक्टर सहित तमाम अमले को इसकी सुरक्षा और देखभाल को लेकर सरकार तमाम सुविधाएं उपलब्ध करा रही है ऐसे में लगातार बाघों की मौंत होना अनेक सवालों को जन्म दे रही है। वहीं धरना प्रदर्शन में बैठे पत्रकारों का कहना है कि 14 सूत्रीय मांगे बिल्कुल जायज है और जनहित से जुडी हुई हैं। इन मांगो का निराकरण और समाधान कान्हा विभाग को सार्वजनिक रूप से करना चाहिए।
पांच दिन से चल रहे धरना प्रदर्शन में पहुंच रहे वनप्रेमी अनेक तरह के छुपे राज मीडिया को बता रहे हैं। यहां पर पहुंच रहे लोगों का कहना है कि कान्हा राष्ट्रीय उद्यान में नियम कानूनों की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। यहां पर शादी विवाह पार्टी खुलेआम डीजे और अतिशबाजी दिखाई देती है तो दूसरी तरफ मसाज पार्लर भी संचालित हो रहे हैं। पर्यटकों का कहना है यह पार्क है या गोवा यहां लोग सुकून की तालाश में आते हैं और यहां की हरियाली पेड़-पौधे जीव जंतु और जानवरों का दीदार करने कई दिनों तक सफारी करते रहते हैं सफारी में पानी की तरह पैसा बहाने के बाद भी कोई खास उत्साह नही रह जाता है।
कान्हा गेट से लगे रिसोर्ट हॉटलों में नियम कानूनों की धज्जियां उड़ रही हैं तेज साउंड से गाना बजाना तो खुलेआम पूल पार्टी आम बात हो गई है। वहीं यहां पर पर्यावरण की भी अनदेखी की जा रही है। गेट से लगे होटल रिसोर्टो में लकड़ी चूल्हा जलाया जा रहा है जो स्थानीय जंगल से अवैध रूप से लकड़ी लाकर किया जाता है। तो वहीं खुलेआम पॉलीथीन का भी उपयोग हो रहा है। यहां पर पॉलीथीन का खुलेआम उपयोग हो रहा है मांस मदिरा की बहार हर तरफ दिखाई देती है इनके विनिष्टीकरण अपशेष्ट को कहां फेंका जाता है इसकी भी कोई जानकारी नही हैं हर तरफ गंदगी ही गंदगी पाऊच पन्नी डिस्पोजल, शराब की खाली बोतले दिखाई देते हैं।
वर्षो पुराने वाहन खटारा गाडिय़ां यहां दिखाई देती हैं तो दूसरी तरफ बाघों की मौंत से वनप्रेमी जमकर आक्रोशित नजर आ रहे हैं। कान्हा राष्ट्रीय उद्यान में लगातार सामने आ रही बाघों की मौतों और वन्य प्रबंधन से जुड़े विवादों को लेकर जिले के पत्रकारों का आंदोलन अब व्यापक रूप लेता जा रहा है।
मंडला कलेक्ट्रेट मार्ग पर पत्रकारों द्वारा दिया जा रहा धरना प्रदर्शन रविवार को छठवें दिन भी जारी रहा। आंदोलन में जिले के विभिन्न पत्रकार संगठनों के साथ सामाजिक कार्यकर्ता और आम नागरिक भी शामिल हो रहे हैं। कान्हा में लगातार बाघों की मौत हो रही है लेकिन प्रबंधन द्वारा सही जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा रही।
कई मामलों में मीडिया को गुमराह करने और वास्तविक तथ्यों को छिपाने का प्रयास किया गया है। धरना स्थल पर मौजूद पत्रकारों ने कहा कि कान्हा देश और दुनिया में टाइगर रिजर्व के रूप में अपनी अलग पहचान रखता है। यहां की जैव विविधता और वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था को आदर्श माना जाता रहा है लेकिन हाल के दिनों में लगातार बाघों की मौतों ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पत्रकारों का आरोप है कि यदि समय रहते पारदर्शिता और जवाबदेही तय नहीं की गई तो वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था पर लोगों का भरोसा कमजोर हो जाएगा।
कान्हा राष्ट्रीय उद्यान देश के सबसे प्रसिद्ध टाइगर रिजर्व में शामिल है। मध्यप्रदेश के मंडला और बालाघाट जिलों में फैला यह राष्ट्रीय उद्यान अपनी समृद्ध जैव विविधता घने साल के जंगलों घास के विशाल मैदानों और दुर्लभ वन्यजीवों के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। कान्हा राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना वर्ष 1955 में की गई थी जबकि वर्ष 1973 में इसे प्रोजेक्ट टाइगर के तहत टाइगर रिजर्व घोषित किया गया।
कान्हा टाइगर रिजर्व का कुल क्षेत्रफल लगभग 2,051 वर्ग किलोमीटर है जिसमें कोर और बफर क्षेत्र दोनों शामिल हैं। इसके कोर क्षेत्र का विस्तार लगभग 940 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। यह पार्क विशेष रूप से बारासिंघा स्वैम्प डियर के संरक्षण के लिए प्रसिद्ध है। एक समय विलुप्ति की कगार पर पहुंच चुके हार्डग्राउंड बारासिंघा को बचाने में कान्हा की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इसके अलावा यहां बाघ, तेंदुआ, जंगली कुत्ता, भालू, गौर, सांभर, चीतल और सैकड़ों प्रजातियों के पक्षी पाए जाते हैं।
कान्हा के प्रमुख पर्यटन जोन में किसली, मुक्की, कान्हा, सरही और खटिया क्षेत्र शामिल हैं। यहां हर वर्ष देश-विदेश से लाखों पर्यटक जंगल सफारी और वन्यजीवों को देखने पहुंचते हैं। प्राकृतिक सुंदरता और वन्यजीव विविधता के कारण कान्हा को एशिया के सबसे बेहतर प्रबंधित राष्ट्रीय उद्यानों में गिना जाता रहा है।
