
डिजिटल इंडिया के दौर में गेहूं तुलाई के लिए दर-दर भटक रहा अन्नदाता
दैनिक रेवांचल टाइम्स, मंडला/ एक तरफ सरकार मंचों से जहां “डिजिटल इंडिया” का ढोल पीट रही है, गांव-गांव इंटरनेट पहुंचाने और किसानों को ऑनलाइन सुविधाओं से जोड़ने के दावे किए जा रहे हैं, तो दूसरी तरफ मंडला जिले का किसान गेहूं तुलाई के लिए मोबाइल हाथ में लेकर नेटवर्क और सर्वर का मुंह ताक रहा है। हालत यह है कि किसान खेत से ज्यादा अब “स्लॉट बुकिंग” की खेती करने में जुट गया है।
रबी सीजन में जहां किसानों को अपनी मेहनत की फसल उपार्जन केंद्रों तक पहुंचाकर समय पर तुलाई करवानी चाहिए थी, वहीं किसान “सर्वर डाउन”, “ऐप नहीं चल रहा”, “स्लॉट फुल” और “फिर से प्रयास करें” जैसे संदेशों से जूझ रहा है। सवाल यह उठता है कि आखिर डिजिटल व्यवस्था किसानों की सुविधा के लिए बनाई गई है या उनकी परीक्षा लेने के लिए?
गांवों में किसान सुबह से शाम तक मोबाइल लिए बैठे हैं। कोई साइबर कैफे के चक्कर काट रहा है, तो कोई समिति के कर्मचारियों के सामने हाथ जोड़ रहा है। लेकिन स्लॉट ऐसा गायब है मानो सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता गायब हो गई हो। किसान परेशान है, लेकिन जिम्मेदार विभागों के सर्वर की तरह अफसरों की संवेदनाएं भी डाउन दिखाई दे रही हैं।
सरकार खुद को किसान हितैषी बताने में कोई कसर नहीं छोड़ती, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि किसान अपनी उपज लेकर उपार्जन केंद्रों के बाहर धूप में खड़ा है और व्यवस्था एसी कमरों में बैठकर “तकनीकी समस्या” का बहाना बना रही है। यदि समय रहते स्लॉट बुक नहीं हुए और गेहूं की तुलाई नहीं हुई, तो मजबूर किसान औने-पौने दामों में व्यापारियों को गेहूं बेचने को विवश होगा। इसका सीधा नुकसान उस किसान को होगा जिसने दिन-रात मेहनत कर खेतों में अन्न रूपी सोना उगाया है।
वर्तमान हालत और सरकार के द्वारा की जा रही घोर लापरवाही को देख कर प्रदेश का किसान तो अब यही कह रहा हैं कि लगता अब किसान को गेहूं बेचने से पहले खेती नहीं, बल्कि कंप्यूटर इंजीनियरिंग का कोर्स करना पड़ेगा। खेत में पानी कम पड़े तो फसल बच सकती है, लेकिन सर्वर डाउन हो जाए तो किसान सर8 की सारी
उम्मीदें ही सूख जाती हैं।
डिजिटल इंडिया में किसान की हालत ऐसी हो गई है कि अब वह ट्रैक्टर से कम और “रिफ्रेश बटन” ज्यादा चला रहा है।
सरकार कहती है — प्रदेश के साथ हिस्सत जिले के किसान स्लॉट बुक न होने और अपनी उपार्जन की तुलाई समय पर होता न देख कारण से सरकार पर आरोप लगाते हुए कह रहे हे कि “किसान देश की रीढ़ है”, लेकिन सिस्टम ने उस रीढ़ को इतना झुका दिया है कि अब किसान गेहूं नहीं, व्यवस्था का बोझ ढो रहा है।
आने वाले समय पर अब देखने वाली बात यह होगी कि सरकार किसानों की इस समस्या का समाधान करती है या फिर इस बार भी “सर्वर अपडेट” और “तकनीकी दिक्कत” का बहाना बनाकर अन्नदाता को भगवान भरोसे छोड़ दिया जाएगा।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
स्लॉट बुक की समस्या सिर्फ मंडला जिले में ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश में ही बनी हुई हैं,, हमने किसानों की इस परेशानी को भोपाल तक पहुंचा दिया है उम्मीद है जल्द ही हालात सुधरेंगे और किसान अपनी उपार्जन को सोसायटी में तुलवा पायेगा।
संत कुमार भलावी
जिला आपूर्ति खाद्या अधिकारी
मंडला
