पुलिस की कार्रवाई से खुली आबकारी विभाग की पोल, पवित्र नगरी मण्डला में अवैध शराब माफियाओं का फैलता साम्राज्य

Revanchal
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50 पेटी बीयर सहित तीन आरोपी गिरफ्तार, शराब दुकान से जुड़े गद्दीदार पर भी मामला दर्ज


प्रतिबंध के बाद गली-गली बिक रही शराब, चाय दुकानों से ढाबों तक बना अवैध नेटवर्क


मण्डला।
पवित्र नगरी मण्डला में शराबबंदी और नर्मदा तट की पवित्रता बनाए रखने के दावों के बीच अवैध शराब कारोबार तेजी से पैर पसारता दिखाई दे रहा है। बिछिया पुलिस द्वारा 50 पेटी बीयर सहित तीन आरोपियों की गिरफ्तारी ने न केवल शराब तस्करी के बड़े नेटवर्क का खुलासा किया है, बल्कि आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।


एक ओर शासन ने नर्मदा नदी से 5 किलोमीटर के दायरे में शराब दुकानों पर प्रतिबंध लगाकर धार्मिक वातावरण सुरक्षित रखने की कोशिश की, वहीं दूसरी ओर अब जिलेभर में अवैध शराब बिक्री खुलेआम होने लगी है। गांवों, कस्बों, चौराहों और मुख्य मार्गों पर शराब माफियाओं का नेटवर्क सक्रिय बताया जा रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बिना विभागीय संरक्षण के इतना बड़ा कारोबार संभव नहीं है।


पुलिस की तत्परता से पकड़ी गई लाखों की शराब
थाना बिछिया पुलिस ने विशेष अभियान के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए एक लाख रुपये से अधिक कीमत की अवैध अंग्रेजी शराब जब्त की है। यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक मण्डला राजेश रघुवंशी, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शिव कुमार वर्मा एवं एसडीओपी सौरव तिवारी के निर्देशन में की गई।


पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि सफेद रंग की टवेरा वाहन क्रमांक एमपी 20 टी 6561 से अवैध शराब बिछिया से मण्डला की ओर ले जाई जा रही है। सूचना के आधार पर थाना बिछिया के सामने एनएच-30 पर नाकाबंदी कर वाहन की तलाशी ली गई, जिसमें भारी मात्रा में बीयर बरामद हुई।


पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि शराब बिछिया स्थित अंग्रेजी शराब दुकान से लाई जा रही थी। जांच के बाद संबंधित दुकान के गद्दीदार को भी आरोपी बनाया गया और न्यायालय में पेश किया गया।


34(2) आबकारी एक्ट के तहत मामला दर्ज
मामले में थाना बिछिया में अपराध क्रमांक 193/2026 के तहत धारा 34(2) आबकारी अधिनियम के अंतर्गत प्रकरण दर्ज किया गया है। गिरफ्तार आरोपियों में—
भवानी बरमैया निवासी रंगरेज घाट, मण्डला
सुनील कुमार सिंह निवासी पलामू, झारखंड
रामाश्रय पांडे निवासी औरंगाबाद, बिहार
शामिल हैं।


पुलिस ने आरोपियों से—
50 पेटी बीयर (लगभग 600 लीटर)
शराब कीमत लगभग 1,64,400 रुपये
टवेरा वाहन कीमत लगभग 8 लाख रुपये
सहित कुल 9,64,400 रुपये का मशरूका जब्त किया है।


इस कार्रवाई में थाना प्रभारी निरीक्षक रंजीत सिंह सैयाम सहित पुलिस टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।


पुलिस कार्रवाई से आबकारी विभाग पर उठे सवाल
जिस अवैध शराब तस्करी का खुलासा पुलिस ने किया, उसने आबकारी विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि शराब दुकान से इतनी बड़ी मात्रा में शराब बाहर जा रही थी, तो विभाग को इसकी जानकारी क्यों नहीं थी?


लोगों का आरोप है कि कार्रवाई केवल छोटे स्तर पर दिखाई जाती है, जबकि बड़े सप्लायर और नेटवर्क पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती। कई सामाजिक संगठनों ने आबकारी विभाग की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग की है।


एक माह बाद भी शराब दुकान में पुराने ठेकेदार का बोर्ड
बिछिया स्थित शराब दुकान में ठेकेदार बदले हुए एक माह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन दुकान के बाहर अब भी पुराने लाइसेंसी ठेकेदार राजेश पटेल के नाम का बोर्ड लगा हुआ है।


स्थानीय लोगों का कहना है कि शासन के नियमों के अनुसार वर्तमान लाइसेंसी और संचालन संबंधी जानकारी स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करना अनिवार्य है, ताकि जनता को पारदर्शी जानकारी मिल सके। इसके बावजूद पुराने नाम का बोर्ड लगे रहना नियमों की अनदेखी माना जा रहा है।
लोगों ने मांग की है कि यदि यह नियम उल्लंघन की श्रेणी में आता है, तो संबंधित ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो।


प्रतिबंध के बाद गली-गली खुल गए अवैध शराब अड्डे
नर्मदा तट क्षेत्र में शराब दुकानों पर प्रतिबंध के बाद हालात और चिंताजनक हो गए हैं। लाइसेंसी दुकानों के बंद होने के बाद अब चाय दुकानों, ढाबों, होटलों, किराना दुकानों और यहां तक कि घरों व खेतों से भी शराब बिक्री होने के आरोप लग रहे हैं।


स्थानीय लोगों का कहना है कि अब प्रतिबंधित क्षेत्र में पहले से ज्यादा आसानी से शराब उपलब्ध हो रही है। कई जगहों पर नाबालिगों तक को शराब बेचे जाने की शिकायतें सामने आई हैं।


प्रिंट रेट से अधिक कीमत पर बिक रही शराब
अवैध शराब कारोबारियों द्वारा लोगों से मनमाने दाम वसूले जा रहे हैं।
बताया जा रहा है कि—
100 रुपये की शराब 150 से 200 रुपये तक
बीयर और ब्रांडेड शराब दोगुनी कीमत पर
गांवों में “डिलीवरी चार्ज” लेकर सप्लाई
की जा रही है।
यानी प्रतिबंध का फायदा उठाकर शराब माफिया मोटी कमाई कर रहे हैं।


सिलगी तिराहा में मुख्य मार्ग पर संचालित हो रहे अहाते
बम्हनी बंजर स्थित सिलगी तिराहा में अंग्रेजी शराब दुकान के पास संचालित तथाकथित अहाते इन दिनों चर्चा का विषय बने हुए हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि मुख्य मार्ग पर खुलेआम बैठाकर शराब पिलाई जा रही है। यहां पानी और अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।
शाम के समय शराबियों की भीड़ के कारण ट्रैफिक जाम जैसी स्थिति बन जाती है। इसी मार्ग से स्कूल-कॉलेज के छात्र-छात्राएं और यात्री गुजरते हैं, जिससे असहज माहौल पैदा हो रहा है।


बड़ी दुर्घटना का इंतजार?
सिलगी तिराहा भारी वाहनों और बसों की आवाजाही वाला प्रमुख मार्ग है। पूर्व में यहां कई सड़क हादसे हो चुके हैं। इसके बावजूद खुलेआम शराब सेवन जारी रहने से लोगों में नाराजगी है।
स्थानीय परिवारों का कहना है कि नशे में धुत लोगों द्वारा अभद्रता और हंगामा आम हो गया है, जिससे महिलाओं और बच्चों को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ रही है।


प्रशासन से बड़ी कार्रवाई की मांग
सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि—
जिलेभर में संयुक्त छापेमारी अभियान चलाया जाए
अवैध शराब सप्लाई नेटवर्क तोड़ा जाए
आबकारी एवं पुलिस विभाग की भूमिका की जांच हो
सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई जाए


नर्मदा तट क्षेत्र को पूर्ण रूप से नशामुक्त बनाया जाए
मुख्य मार्गों पर संचालित अवैध अहातों को तत्काल बंद कराया जाए
अब बड़ा सवाल यही है कि जब प्रतिबंध के बाद भी हर गली में शराब आसानी से उपलब्ध हो रही है, तो आखिर जिम्मेदार कौन है? क्या प्रशासन शराब माफियाओं के सामने बेबस है, या फिर संरक्षण का खेल चल रहा है?

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