नर्मदा बोरवेल कर्मचारियों पर गुंडे बुलाकर हमला कराने का आरोप, महिलाओं और बच्चों तक को नहीं बख्शा
दैनिक रेवांचल टाईम्स – मंडला जिले के घुघरी थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम घोरेघाट में शनिवार देर रात हुई खूनी वारदात ने पूरे इलाके को दहला दिया। मामूली पैसों के विवाद ने ऐसा हिंसक रूप ले लिया कि एक युवक की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद गांव में भारी आक्रोश और तनाव का माहौल बना हुआ है।
“सामान के पैसे मांगे तो बुला लिए गुंडे”
शराब के नशे में विवाद, फिर गांव में बरपा खूनी कहर
जानकारी के अनुसार गांव में नर्मदा बोरवेल की मशीन द्वारा बोरिंग कार्य किया जा रहा था। आरोप है कि देर रात बोरवेल कंपनी के कुछ कर्मचारी शराब के नशे में स्थानीय किराना दुकान पर पहुंचे और सामान लेने के बाद पैसे देने को लेकर विवाद करने लगे।
जब दुकान संचालक संतोष पड़वार ने सामान के पैसे मांगे तो आरोपी भड़क उठे और गाली-गलौज करने लगे। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि कर्मचारियों ने मंडला से कथित तौर पर 6 फोर व्हीलर वाहनों में भरकर बाहरी गुंडों को बुला लिया।
लाठी-डंडों और हथियारों से हमला
भाई को बचाने पहुंचे युवक की मौके पर मौत
ग्रामीणों के अनुसार गांव पहुंचते ही हमलावरों ने संतोष पड़वार पर लाठी-डंडों और धारदार हथियारों से हमला कर दिया। गांव के लोग बीच-बचाव करने पहुंचे तो स्थिति और भयावह हो गई।
इसी दौरान संतोष का छोटा भाई अनिल पड़वार अपने भाई को बचाने के लिए आगे आया, लेकिन आरोपियों ने उस पर भी बेरहमी से हमला कर दिया। सिर और शरीर पर गंभीर चोटें लगने से अनिल पड़वार की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।
घटना के बाद गांव में चीख-पुकार मच गई और पूरा परिवार दहशत में आ गया।
महिलाओं और मासूम बच्चों तक को पीटा
हमलावरों की हैवानियत से दहला गांव
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि हमलावर इतने उग्र थे कि उन्होंने महिलाओं और छोटे बच्चों तक को नहीं छोड़ा। बीच-बचाव करने आए परिवार के सदस्यों को भी बेरहमी से पीटा गया।
ग्रामीणों का आरोप है कि बाहरी लोगों ने गांव में खुलेआम आतंक मचाया और घंटों तक उत्पात करते रहे। घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में भय और आक्रोश का माहौल है।
“आरोपी गिरफ्तार नहीं हुए तो नहीं होगा पोस्टमार्टम”
परिजनों का अस्पताल में हंगामा, प्रशासन को चेतावनी
घटना के बाद घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र घुघरी में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। मृतक अनिल पड़वार का शव भी अस्पताल परिसर में रखा गया है।
मृतक के बड़े भाई अशोक पड़वार ने साफ चेतावनी दी है कि जब तक सभी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होती और परिवार को न्याय नहीं मिलता, तब तक पोस्टमार्टम नहीं कराया जाएगा।
इस घटना के बाद अस्पताल परिसर और गांव में भारी तनाव की स्थिति बनी हुई है।
बोर बंद के बाद भी कैसे चल रहा था काम?
प्रशासन और खनिज विभाग की भूमिका पर उठे सवाल
घटना के बाद ग्रामीणों में इस बात को लेकर भी भारी नाराजगी है कि प्रतिबंध और नियमों के बावजूद आखिर बोरवेल कार्य धड़ल्ले से कैसे चल रहा था? लोगों का आरोप है कि बिना प्रशासनिक संरक्षण के इस तरह खुलेआम बोरिंग कार्य संभव नहीं है।
अब सवाल यह भी उठ रहे हैं कि क्या जिम्मेदार विभागों की अनदेखी और मिलीभगत के कारण बाहरी कंपनियां गांवों में मनमानी कर रही हैं? अगर समय रहते निगरानी होती तो शायद यह खूनी घटना टाली जा सकती थी।
पुलिस जांच में जुटी गांव में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात घटना की सूचना मिलते ही पूजा बघेल पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचीं। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है। गांव में तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि सभी आरोपियों को तत्काल गिरफ्तार किया जाए, बोरवेल कंपनी की भूमिका की निष्पक्ष जांच हो और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाया जाए। अब पूरा क्षेत्र प्रशासन की कार्रवाई पर नजर लगाए बैठा है।
वही जानकारी के अनुसार इन दिनों तत्तकालीन कलेक्टर के आदेश अनुसार बोरिग कार्य पूर्णतः प्रतिबंधित है वावजूद इसके बोर संचालकों के द्वारा रात के अंधेरे में चोरी छुपे बिना अनुमति के गाँव गाँव जाकर बोरिग कार्य किया जा रहा है और कहि न कही यह स्थानीय प्रशासन पुलिस प्रशासन की नाकामी साबित करते हुए या कहे तालमेल बैठा कर बोरिग का कार्य धड़ल्ले से चल रहा है वही दुसरी ओर अत्यधिक आवश्कता होने पर सार्वजनिक स्थानों में बोर करने की जिला कलेक्टर और एस डी एम कार्यालय से अनुमति प्राप्त कर बोरिंग की जा सकती है पर लोगों की निजी बोरिंग कार्य पूर्णतः प्रतिबंधित है वावजूद इसके बोरिग कार्य किया जा रहा है।
