इंस्टाग्राम की पोस्ट से चली गोली: जबलपुर में अब ‘लाइक’ और ‘कमेंट’ का जवाब पिस्टल से दिया जा रहा है?

Revanchal
4 Min Read


जबलपुर। यह कहानी सिर्फ एक गोली चलने की नहीं है। यह कहानी उस शहर की है जहां अब विवाद थाने में नहीं, सोशल मीडिया पर शुरू होते हैं और उनका फैसला सड़क पर पिस्टल और चाकू से किया जा रहा है।
गोहलपुर थाना क्षेत्र के दमोहनाका स्थित छोटे फुहारा इलाके में जो कुछ हुआ, उसने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर जबलपुर में कानून का डर खत्म हो रहा है या अपराधियों का हौसला लगातार बढ़ रहा है?


पूरा विवाद किसी जमीन, करोड़ों की ठगी या गैंगवार से नहीं शुरू हुआ। शुरुआत हुई एक इंस्टाग्राम पोस्ट से।
आदि दीक्षित का जन्मदिन था। पुराने विवाद के चलते रितिक ठाकुर ने इंस्टाग्राम पर उसकी पिटाई का एक पुराना वीडियो पोस्ट कर दिया। कैप्शन लिखा… हैप्पी बर्थडे छोटे। सोशल मीडिया की दुनिया में यह एक तंज था, लेकिन इसी तंज ने आगे चलकर खून-खराबे की पटकथा लिख दी।


अमन उर्फ अम्बर श्रीवास ने भी अपने दोस्त की पोस्ट को शेयर कर दिया। आरोप है कि यह पोस्ट देखते ही आदि दीक्षित आगबबूला हो गया। अगले दिन से वह अपने साथियों के साथ अमन और रितिक को तलाशने लगा। फोन पर गालियां दी गईं, धमकियां दी गईं और फिर समझौते का प्रस्ताव आया।


लेकिन सवाल यह है कि क्या वास्तव में समझौता होना था या फिर यह सिर्फ जाल बिछाने की तैयारी थी?
28 मई की रात छोटे फुहारा में दोनों पक्ष आमने-सामने पहुंचे। बातचीत शुरू हुई, लेकिन कुछ ही देर बाद माहौल बिगड़ गया। पहले थप्पड़ चला, फिर चाकू निकला और उसके बाद वह हुआ जो आजकल जबलपुर में चिंताजनक रूप से सामान्य होता जा रहा है… पिस्टल बाहर आ गई।


प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस को दिए गए बयानों के मुताबिक आरोपी आदि दीक्षित ने अपनी स्कूटी की डिग्गी से पिस्टल निकाली। पहले हवा में फायर किया गया। शायद मकसद डर पैदा करना था। लेकिन जब सामने वाले युवक नहीं भागे तो कथित तौर पर सीधा निशाना साधा गया।


पहली बार ट्रिगर दबा, लेकिन गोली नहीं चली।
यह वह क्षण था जहां शायद किस्मत ने अमन का साथ दिया।
लेकिन अगली ही सेकंड ट्रिगर फिर दबा और इस बार गोली चल गई। गोली अमन के पैर में लगी और वह सड़क पर गिर पड़ा। कुछ मिनट पहले जो लोग समझौते की बात कर रहे थे, अब उनमें से एक खून से लथपथ जमीन पर पड़ा था।
घटना के बाद आरोपी भाग निकले, लेकिन जाते-जाते एक और संदेश छोड़ गए… आज तो बच गए, अगली बार जान से खत्म कर देंगे।
यह सिर्फ धमकी नहीं थी, बल्कि शहर की कानून व्यवस्था के लिए खुली चुनौती थी।


सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर युवाओं के हाथों में मोबाइल से ज्यादा आसानी से हथियार कैसे पहुंच रहे हैं? क्यों मामूली रंजिशें सीधे हत्या के प्रयास तक पहुंच रही हैं? और क्यों हर कुछ दिनों में जबलपुर की सड़कों पर चाकू, पिस्टल और खून की नई कहानी लिखी जा रही है?


संस्कारधानी कहलाने वाला शहर इन दिनों अपराध की खबरों से ज्यादा पहचाना जाने लगा है। कभी चाकूबाजी, कभी हत्या, कभी बमबाजी और अब सोशल मीडिया पोस्ट पर गोलीबारी।


पुलिस ने हत्या के प्रयास सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है। लेकिन शहर के लोगों के मन में एक सवाल अब भी तैर रहा है… आखिर जब विवादों का समाधान अदालत और कानून की जगह पिस्टल करने लगे, तब समाज किस दिशा में जा रहा होता है?
मुहम्मद अनवार बाबू

👁️ 1 views Views
Share This Article
Translate »