उपयंत्री की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल
दैनिक रेवांचल टाइम्स बजाग – जनपद पंचायत क्षेत्र की ग्राम पंचायतों में चल रहे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि तकनीकी अमले की मिलीभगत से कई निर्माण कार्यों में खुलेआम अनियमितताएं की जा रही हैं, जबकि शिकायतों के बाद भी जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई के बजाय चुप्पी साधे हुए हैं। इससे निर्माण कार्यों में गड़बड़ी करने वालों के हौसले बुलंद हैं।
ताजा मामला ग्राम पंचायत आमाडोंगरी का है, जहां लगभग 105 मीटर लंबे सीसी सड़क निर्माण कार्य में गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। नन्हू, राजू और श्रवण के घर के समीप से महारानी तक बनाई जा रही सड़क में ग्रामीणों ने गुणवत्ता संबंधी कई खामियां उजागर की हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में निर्धारित मानकों के विपरीत मिट्टी युक्त काली रेत का उपयोग किया जा रहा है। इतना ही नहीं, कंक्रीट मिश्रण को मजबूत और टिकाऊ बनाने के लिए आवश्यक वाइब्रेटर मशीन का उपयोग भी नहीं किया जा रहा है, जिससे कंक्रीट सही ढंग से सेट नहीं हो पा रहा है। सिर्फ दिखावे के लिए स्थल पर मशीन रखी गई है
सबसे गंभीर आरोप सड़क की मोटाई को लेकर लगाए जा रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार जहां सड़क की निर्धारित मोटाई आठ इंच होनी चाहिए, वहां केवल छह इंच मोटी कंक्रीट ढलाई की जा रही है।
आरोप है कि दो इंच मोटाई कम कर निर्माण लागत में कटौती की जा रही है और शासकीय राशि का दुरुपयोग कर जेबें भरने का काम किया जा रहा है। इससे सड़क की मजबूती और लंबी उम्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि निर्माण स्थल पर सूचना बोर्ड नहीं लगाया गया है, जबकि किसी भी शासकीय निर्माण कार्य में लागत, स्वीकृति, एजेंसी, कार्य अवधि और तकनीकी विवरण की जानकारी प्रदर्शित करना आवश्यक माना जाता है। सूचना बोर्ड नहीं होने से ग्रामीणों को निर्माण कार्य की स्वीकृत राशि, तकनीकी मानकों और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां नहीं मिल पा रही हैं, जिससे पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि उपयोग की जा रही रेत की गुणवत्ता भी मानकों के अनुरूप नहीं है। यदि इसी प्रकार घटिया सामग्री से निर्माण किया गया तो सड़क कम समय में ही दरक सकती है और उखड़ने लग सकती है, जिससे शासकीय धन का नुकसान होने के साथ आम जनता को भी परेशानी झेलनी पड़ेगी।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि उपयंत्री तथा ग्राम पंचायत के सरपंच-सचिव की कथित मिलीभगत के चलते निर्माण कार्यों की गुणवत्ता से समझौता किया जा रहा है। निर्माण स्थल पर सामने आ रही खामियों से पूरे कार्य में कमीशनखोरी की आशंका व्यक्त की जा रही है।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराने, सड़क की मोटाई एवं उपयोग की गई सामग्री की गुणवत्ता की स्वतंत्र जांच करवाने, सूचना बोर्ड न लगाने के कारणों की पड़ताल करने तथा दोषी पाए जाने वाले जिम्मेदारों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है। अब ग्रामीणों की मांग यह है कि प्रशासन इन आरोपों को कितनी गंभीरता से लेते हुए जांच और कार्रवाई करता है।
