पवित्र नर्मदा की गोद में अवैध शराब का तांडव

Revanchal
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आबकारी-ठेकेदार मिलीभगत से धार्मिक नगरी बन गई शराब नगरी

सीएम के आदेश और गाइडलाइंस ताक पर

दैनिक रेवांचल टाइम्स मंडला। नर्मदा की पावन धारा में स्नान कर पुण्य कमाने वाले श्रद्धालुओं की नगरी मंडला अब अवैध शराब के अड्डे में तब्दील हो चुकी है। सरकार द्वारा पवित्र धार्मिक नगरी घोषित किए जाने, नर्मदा किनारे 5 किलोमीटर दायरे में पूर्ण शराब प्रतिबंध लगाने, ड्रोन कैमरों से आसमान निगरानी और जमीन पर सख्त रात्रि गश्त के बावजूद यहां शराब बेखौफ बिक रही है। ठेकेदारों की मनमानी और आबकारी विभाग की कथित मिलीभगत से पवित्रता पर लगातार तमाचे पड़ रहे हैं।


जिस शराब के ठेके रिकॉर्ड 148 करोड़ रुपये में लगे, उसी का काला धंधा अब गली-मोहल्लों, गांव-ढाबों तक फैल चुका है। स्वदेश से बातचीत में एक शराब बेचने वाले ने नाम न छापने की शर्त पर खुलासा किया, “ठेकेदार का साफ आदेश है—हमारी शराब बेचो, वरना कार्रवाई। हमारी बेचोगे तो कोई छापा नहीं पड़ेगा।” आबकारी विभाग ठेकेदार के इशारे पर चल रहा है। जहां ठेकेदार कहता है, वहीं छापा पड़ता है।


नियमों का खुला उल्लंघन, मनमाने दाम
पवित्र नगरी की गाइडलाइंस और मुख्यमंत्री के सख्त आदेशों के बावजूद नर्मदा से मात्र 5 किलोमीटर दायरे में शराब का धड़ल्ले से कारोबार चल रहा है। बस स्टैंड, बिझिया, पुरवा, महाराजपुर, सब्जी मार्केट, लालीपुर, संगमघाट, देवदरा, कारीकोन, बड़ी खैरी, कटरा, बायपास, बुधवारी सहित दर्जनों जगहों पर ठेकेदार की शराब खुलकर पहुंच रही है। होम डिलीवरी का नेटवर्क भी बेरोकटोक चल रहा है।


सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि शराब दुकानों में रेंट लिस्ट तक नहीं लगाई गई है। शराब मनमाने दामों पर बेची जा रही है—प्रिंट रेट से कहीं ज्यादा। ठेकेदार के कर्मचारी कंपनी के टैग लगाकर बोतलें बेच रहे हैं। टैग वाली शराब पकड़े जाने पर केस नहीं बनता, जबकि बिना टैग वाली शराब पकड़कर ही केस बनाया जाता है। इससे साबित होता है कि पूरा सिस्टम ठेकेदार के नियंत्रण में है।


ठेकेदार शहर में स्कूटी-बाइक के जरिए शराब का वितरण करवा रहा है। हिरदेगंज, अंजनिया, बम्हनी जैसी दुकानों से नगर के अंदर सप्लाई की जा रही है, जहां 5 किलोमीटर प्रतिबंधित क्षेत्र का नियम साफ तौर पर टूट रहा है। पान-चाय की दुकानों, किराना स्टोर्स से लेकर घर-घर तक शराब पहुंच सेवा उपलब्ध है।


निगरानी का मजाक, जनता की आंखों में धूल
ड्रोन उड़ रहे हैं, रात्रि गश्त हो रही है, अखबारों में खबरें छप रही हैं, फिर भी अवैध कारोबार फल-फूल रहा है। सोशल मीडिया पर लोग खुलकर आरोप लगा रहे हैं कि बिना प्रशासनिक मिलीभगत के इतना बड़ा धंधा संभव नहीं। ठेकेदार के मैनेजर नए-नए बिक्री पॉइंट्स ढूंढ रहे हैं और रिस्क पर काम चला रहे हैं। मंडला की धार्मिक आस्था और पवित्र नर्मदा को कलंकित करने वाला यह खेल कब तक चलेगा? आबकारी विभाग की भूमिका संदिग्ध है। ठेकेदारों की मनमानी और विभाग की कथित मिलीभगत से न सिर्फ कानून का उल्लंघन हो रहा है, बल्कि जनता की आस्था पर भी चोट पहुंच रही है।

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