मेंटेनेंस के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति!
दैनिक रेवांचल टाइम्स/घुघरी भीषण गर्मी की शुरुआत होते ही घुघरी क्षेत्र में विद्युत विभाग की लचर व्यवस्था और लापरवाही खुलकर सामने आने लगी है। आलम यह है कि पूरे साल चैन की नींद सोने वाला विभाग अब आंधी-तूफान के मौसम में मेंटेनेंस की सुध ले रहा है, जिसके कारण क्षेत्र की जनता को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। दिनभर में 20 से अधिक बार हो रही अघोषित बिजली कटौती ने आम नागरिकों, व्यापारियों और विद्यार्थियों का जीना मुहाल कर दिया है।
घंटों बंद रहती है बिजली जिम्मेदार अधिकारियों के पास सिर्फ बहाने
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, बीते दिनों सुबह 5 बजे से गुल हुई बिजली देर रात लगभग 12 बजे बहाल हो सकी। इसके बाद भी लगातार ट्रिपिंग और कटौती का सिलसिला जारी रहा।
जब इस अव्यवस्था को लेकर विद्युत विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों से सवाल किए जाते हैं, तो हर बार नया बहाना तैयार मिलता है। अक्सर एक ही जवाब सुनने को मिलता है—
“पेड़ की डाली गिरने के कारण लाइन बंद है।”
अब जनता यह सवाल उठा रही है कि यदि बिजली लाइनों के आसपास मौजूद पेड़ों की छंटाई का कार्य समय रहते कर लिया जाता, तो हर आंधी-तूफान में यही स्थिति क्यों बनती? हर वर्ष मेंटेनेंस के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हालात देखकर साफ प्रतीत होता है कि यह पूरा खेल केवल कागजी खानापूर्ति और बिल-वाउचर तक सीमित है।
बिजली नहीं, लेकिन बिल और जुर्माना समय पर
एक तरफ विभाग चौबीस घंटे निर्बाध बिजली देने में पूरी तरह विफल नजर आ रहा है, वहीं दूसरी ओर गरीब और मध्यमवर्गीय उपभोक्ताओं पर कार्रवाई के नाम पर दबाव बनाया जा रहा है।
क्षेत्र में ऐसे कई मामले देखने और सुनने को आए हैं, जहां दो कमरों के छोटे मकान में रहने वाले गरीब परिवारों पर व्यावसायिक मीटर लगवाने का दबाव डाला जा रहा है। यदि कोई व्यक्ति अपने घर के एक कमरे में छोटी सी दुकान या रोजगार चलाता है, तो विभाग उस पर अलग कमर्शियल मीटर लगाने और भारी जुर्माना थोपने की कार्रवाई कर रहा है। कई उपभोक्ताओं पर 10 हजार से लेकर 50 हजार रुपये तक के प्रकरण बना दिए गए हैं।
जनता के सवालों से घिरा विभाग
अब क्षेत्र की जनता विभाग और प्रशासन से सीधे सवाल पूछ रही है—
क्या दो कमरों के छोटे मकान में रहने वाला गरीब व्यक्ति दो-दो मीटर लगवाए?
मेंटेनेंस के नाम पर खर्च होने वाली सरकारी राशि की जांच आखिर कब होगी?
भीषण गर्मी में अघोषित कटौती से परेशान जनता को राहत कब मिलेगी?
जब बिजली रहती ही नहीं, तो उपभोक्ताओं को भारी-भरकम बिल किस बात के दिए जा रहे हैं?
बिजली विभाग का नया फार्मूला
घुघरी में अब बिजली का नया नियम चल रहा है—
“जब बिजली आए तो खुश हो जाइए, और जब चली जाए तो समझ लीजिए मेंटेनेंस चल रहा है!”
जनता कह रही है कि विभाग ने बिजली सप्लाई कम और बहाने सप्लाई ज्यादा शुरू कर दी है।
मीटर तेजी से दौड़ रहा है, लेकिन बिजली की रफ्तार कछुए से भी धीमी है।
यदि जल्द ही अघोषित कटौती पर रोक नहीं लगी और गरीब उपभोक्ताओं का उत्पीड़न बंद नहीं हुआ, तो क्षेत्र की जनता उग्र आंदोलन करने को मजबूर होगी।
