
ग्राम पंचायत ओहनी में सचिव, सरपंच, उपयंत्री और ठेकेदार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप
शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं, जनपद पंचायत नैनपुर से लेकर जिला पंचायत तक सवालों के घेरे में
दैनिक रेवांचल टाईम्स – मंडला/नैनपुर। “डिजिटल इंडिया”, “ऑनलाइन भुगतान” और “पारदर्शी पंचायत व्यवस्था” के बड़े-बड़े दावों के बीच मंडला जिले की ग्राम पंचायत ओहनी में भ्रष्टाचार का ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पंचायत व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि ग्राम पंचायत ओहनी में तालाब घाट निर्माण कार्य बिना किए ही लगभग 9 लाख रुपये की राशि निकाल ली गई और जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारी अब शिकायत के बाद भी कार्रवाई से बचते नजर आ रहे हैं।
जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत ओहनी में लखमा डोगरिया तालाब में घाट निर्माण के नाम पर सचिव विनीत भोर, सरपंच, रोजगार सहायक, उपयंत्री और ठेकेदार की मिलीभगत से कागजों में निर्माण कार्य दर्शाकर लाखों रुपये का भुगतान कर दिया गया। ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि मौके पर घाट निर्माण दिखाई नहीं देता, लेकिन पोर्टल और दस्तावेजों में पूरा काम दिखाकर राशि आहरित कर ली गई।
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब पंचायतों में हर भुगतान ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से किया जा रहा है, तब आखिर बिना कार्य हुए भुगतान कैसे हो गया? क्या केवल पोर्टल पर बिल अपलोड कर देना ही पारदर्शिता है? कार्य की गुणवत्ता, वास्तविकता और स्थल निरीक्षण की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
मामले को लेकर क्षेत्रीय जनपद पंचायत सदस्य साधना जागेश्वर ठाकुर ने शिकायत दर्ज कराई थी। लेकिन शिकायत के बाद भी जनपद पंचायत नैनपुर के अधिकारियों द्वारा अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं किए जाने से पूरे मामले पर पर्दा डालने के आरोप लग रहे हैं। जनपद पंचायत के अधिकारियों की भूमिका भी अब सवालों के घेरे में आ गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायतों में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन की खुलेआम बंदरबांट हो रही है और शिकायतों को केवल कागजी जांच तक सीमित कर दिया जाता है। जांच के नाम पर फाइलें घूमती रहती हैं, लेकिन दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती। यही कारण है कि भ्रष्टाचार करने वाले अधिकारी और कर्मचारी बेखौफ होकर सरकारी राशि का दुरुपयोग कर रहे हैं।
अब सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या जिला पंचायत मंडला और जनपद पंचायत नैनपुर के जिम्मेदार अधिकारियों को इस मामले की जानकारी नहीं है, या फिर जानबूझकर कार्रवाई में देरी की जा रही है? क्या निगरानी समितियां केवल कागजों तक सीमित हैं? अगर शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं होती तो फिर आम जनता न्याय की उम्मीद किससे करे?
ग्राम पंचायत ओहनी का यह मामला केवल एक पंचायत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे पंचायत तंत्र की जवाबदेही और निगरानी व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर रहा है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करता है या फिर यह मामला भी अन्य शिकायतों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।
इनका कहना है
“मेरे द्वारा शिकायत की गई थी, मगर जनपद पंचायत नैनपुर के अधिकारियों द्वारा अब तक जांच कर कार्रवाई नहीं की जा रही है।”
— साधना जागेश्वर ठाकुर
क्षेत्रीय जनपद पंचायत सदस्य, नैनपुर
