
मंडला जिले में गेहूं खरीदी पूर्ण होने के बाद भी अधिकांश खरीदी केंद्रों में लगभग 70 प्रतिशत गेहूं अब तक पड़ा हुआ है। परिवहन व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई दिखाई दे रही है, जिसका सीधा नुकसान किसानों को उठाना पड़ रहा है। किसानों के पंजीकृत खातों में भुगतान में देरी होना तय माना जा रहा है। दूसरी ओर खुले में रखे गेहूं के खराब होने और मौसम बदलते ही बारिश से भारी नुकसान की आशंका बढ़ गई है।
जानकारी अनुसार लगभग 80 प्रतिशत गेहूं जूट बोरियों में खुले आसमान के नीचे रखा हुआ है।
अंजनिया, ककैया एवं अन्य खरीदी केंद्रों की स्थिति देखने पर यह सामने आया कि परिवहन कार्य लगभग ठप पड़ा है। किसानों और स्थानीय लोगों का कहना है कि खरीदी तो कर ली गई, लेकिन उठाव नहीं होने से केंद्र गोदाम बनकर रह गए हैं। यदि समय रहते परिवहन नहीं हुआ तो गेहूं की गुणवत्ता प्रभावित होगी और इसका आर्थिक नुकसान अंततः किसानों पर पड़ेगा।
इस संबंध में मीडिया द्वारा आपूर्ति विभाग, सिविल सप्लाई कॉरपोरेशन मंडला के जिला प्रबंधक हेमंत वर्मा, जिला खाद्य अधिकारी, एआर सहकारिता एवं जिला सहकारी बैंक के महाप्रबंधक से दूरभाष पर जानकारी लेने का प्रयास किया गया, लेकिन किसानों की समस्या को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों का रवैया संतोषजनक नहीं बताया जा रहा है।
किसानों का आरोप है कि विभागीय समन्वय के अभाव में खरीदी व्यवस्था अव्यवस्थित हो चुकी है।
वहीं दूसरी ओर बिछिया विकासखंड अंतर्गत दानीटोला धान खरीदी केंद्र में सैकड़ों किसानों का करोड़ों रुपये का भुगतान पिछले तीन से चार महीनों से लंबित बताया जा रहा है। भुगतान नहीं होने से किसानों में भारी आक्रोश है। इस मुद्दे को लेकर किसानों ने धरना-प्रदर्शन भी किया तथा कैबिनेट मंत्री संपत्तिया उईके से मुलाकात कर अपनी समस्या रखी।
किसानों का आरोप है कि जिला खाद्य अधिकारी संत कुमार भलावी द्वारा व्यक्तिगत द्वेषवश खरीदी प्रभारी, लेम्स प्रबंधक एवं प्रशासक (जिला सहकारी बैंक शाखा प्रबंधक बिछिया) पर कार्रवाई की गई, जिसके कारण खरीदी और भुगतान प्रक्रिया प्रभावित हुई। आज भी किसानों की धान गोदामों के बाहर पड़ी हुई है और भुगतान लंबित है। अब किसानों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि आने वाली बारिश में यदि धान खराब हो गई तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा।
किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि:
गेहूं और धान के तत्काल परिवहन की व्यवस्था की जाए।
लंबित भुगतान शीघ्र किसानों के खातों में जारी किया जाए।
खुले में रखी उपज को सुरक्षित भंडारण उपलब्ध कराया जाए।
खरीदी व्यवस्था में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
किसान हित में प्रशासन और शासन को तत्काल हस्तक्षेप कर ठोस निर्णय लेने की आवश्यकता है, अन्यथा हजारों किसानों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ सकता है।
