दैनिक रेवांचल टाईम्स – मंडला जिले के मोहगांव स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मोहगांव की स्वास्थ्य व्यवस्थाएं इन दिनों पूरी तरह चरमराई हुई नजर आ रही हैं। अस्पताल में न डॉक्टर समय पर उपलब्ध हैं, न मरीजों को बेहतर इलाज मिल पा रहा है और न ही महिलाओं को शासन की योजनाओं का लाभ बिना रिश्वत दिए मिल रहा है। हालात इतने खराब बताए जा रहे हैं कि अब स्थानीय लोग आंदोलन और रैली निकालने की तैयारी में हैं।
प्रभारी बीएमओ के भरोसे चल रहा अस्पताल
6 महीने से नदारद बताए जा रहे डॉक्टर, फिर भी कार्रवाई नहीं
ग्रामीणों का आरोप है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मोहगांव महीनों से प्रभारी बीएमओ के भरोसे संचालित हो रहा है। अस्पताल में ओपीडी संचालन का कोई निश्चित समय नहीं है और डॉक्टर अपनी मर्जी से बैठते हैं। मरीज घंटों इंतजार करते रहते हैं, लेकिन जिम्मेदारों को इसकी कोई चिंता नहीं।
सबसे ज्यादा सवाल डॉ. झिकराम को लेकर उठ रहे हैं, जो लगभग 25 वर्षों से मोहगांव में पदस्थ बताए जा रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि लंबे समय से एक ही स्थान पर जमे रहने के कारण अस्पताल की व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो चुकी है।
“25 साल से एक ही जगह पोस्टिंग”
स्थानांतरण नहीं होने पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से एक ही स्थान पर पदस्थ रहने के बावजूद आखिर डॉ. झिकराम का स्थानांतरण क्यों नहीं किया जा रहा? आरोप है कि डॉक्टर पिछले लगभग 6 महीनों से अस्पताल से नदारद हैं, लेकिन विभागीय अधिकारियों ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।
ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग की यह चुप्पी कई गंभीर सवाल खड़े करती है। आखिर किसके संरक्षण में वर्षों से यह मनमानी चल रही है?
लाखों के घोटाले के आरोप, फिर भी जांच नहीं
स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
ग्रामीणों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि डॉ. झिकराम के कार्यकाल में अस्पताल में लाखों रुपये के घोटाले और गबन के आरोप भी लगे, लेकिन आज तक किसी प्रकार की निष्पक्ष जांच नहीं हुई। इससे लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब छोटे कर्मचारियों पर तत्काल कार्रवाई हो जाती है तो फिर इतने गंभीर आरोपों के बावजूद जिम्मेदारों पर कार्रवाई क्यों नहीं होती? क्या स्वास्थ्य विभाग भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने में लगा हुआ है?
महिलाओं की योजनाओं में रिश्वतखोरी का आरोप
“पैसा दो तो पात्र, नहीं तो दस्तावेज अधूरे”
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मोहगांव पर महिलाओं को मिलने वाली शासकीय योजनाओं में भी भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लग रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गर्भवती महिलाओं और अन्य हितग्राहियों को योजना का लाभ लेने के लिए रिश्वत देनी पड़ती है।
आरोप है कि यदि कोई महिला पैसा नहीं देती तो दस्तावेजों में कमी बताकर उसे अपात्र कर दिया जाता है, जबकि पैसे देने वालों को नियमों को ताक पर रखकर पात्र बना दिया जाता है। लोगों का दावा है कि यदि पिछले 5 वर्षों में महिलाओं को मिलने वाली योजनाओं और राशि वितरण की निष्पक्ष जांच हो जाए तो बड़ा भ्रष्टाचार उजागर हो सकता है।
अब सड़क पर उतरेगा जनता का गुस्सा
अस्पताल से बस स्टैंड तक निकलेगी रैली
मोहगांव क्षेत्र के लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार नहीं हुआ और जिम्मेदार डॉक्टरों का स्थानांतरण नहीं किया गया तो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से बस स्टैंड तक विशाल रैली निकाली जाएगी।
इसके बाद मुख्यमंत्री के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौंपकर अस्पताल की बदहाल व्यवस्था, भ्रष्टाचार और लंबे समय से जमे डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जाएगी।
नवागत कलेक्टर से जनता की अपील
“मोहगांव अस्पताल को बचाइए, जिम्मेदार डॉक्टर भेजिए”
क्षेत्रीय लोगों ने जिले के नवागत कलेक्टर से अपील की है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मोहगांव की व्यवस्थाओं की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, वर्षों से जमे अधिकारियों-कर्मचारियों को हटाया जाए और अस्पताल में जिम्मेदार एवं कर्तव्यनिष्ठ डॉक्टरों की पोस्टिंग की जाए।
लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधा यदि भ्रष्टाचार और लापरवाही की भेंट चढ़ गई तो गरीब और ग्रामीण जनता आखिर कहां जाएगी? अब देखना होगा कि प्रशासन जनता की पीड़ा सुनता है या फिर मोहगांव अस्पताल की बदहाली यूं ही लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ करती रहेगी।
