बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ या शिक्षा के नाम पर कारोबार? ब्राइट फ्यूचर विद्यालय रेवाड़ा पर मनमानी के गंभीर आरोप, अभिभावकों में आक्रोश

Revanchal
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दैनिक रेवांचल टाइम्स – मंडला। नया शैक्षणिक सत्र शुरू होते ही जहां अभिभावक अपने बच्चों के सुनहरे भविष्य के सपने संजो रहे हैं, वहीं ग्राम रेवाड़ा स्थित ब्राइट फ्यूचर कॉन्वेंट स्कूल एक बार फिर विवादों में है। अभिभावकों ने विद्यालय प्रबंधन पर शिक्षा को सेवा नहीं बल्कि कमाई का जरिया बनाने के गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि मोटी फीस वसूलने के बाद भी स्कूल प्रबंधन महंगी पुस्तकें, कॉपियां और यूनिफॉर्म खरीदने के लिए दबाव बना रहा है, जिससे ग्रामीण और मजदूर परिवार आर्थिक बोझ तले दबते जा रहे हैं।

अभिभावकों का आरोप है कि राज्य शिक्षा केंद्र के नियमों के अनुरूप निर्धारित पुस्तकों के स्थान पर निजी प्रकाशनों की महंगी पुस्तकें चलवाई जा रही हैं। उनका दावा है कि इन पुस्तकों की कीमत हजारों रुपये तक पहुंच रही है, जिससे गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ रहा है। सवाल यह है कि यदि शासन ने नियम तय किए हैं तो उनका पालन कौन सुनिश्चित करेगा?

ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि विद्यालय में मूलभूत सुविधाओं की कमी के बावजूद अभिभावकों से हजारों रुपये की यूनिफॉर्म और अध्ययन सामग्री खरीदने का दबाव बनाया जाता है। उनका कहना है कि कई बार विद्यालय परिसर में इसी मुद्दे को लेकर अभिभावकों और प्रबंधन के बीच विवाद की स्थिति भी बन चुकी है।

कुछ अभिभावकों का आरोप है कि यदि कोई अभिभावक विद्यालय की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है या शिकायत करता है, तो उसकी बात सुनने के बजाय उसे दबाने का प्रयास किया जाता है। वहीं, यदि कोई अपने बच्चे का दूसरे विद्यालय में प्रवेश कराना चाहता है, तो स्थानांतरण प्रमाण-पत्र (टीसी) देने में भी अनावश्यक विलंब और आनाकानी किए जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि विद्यालय को लेकर इस प्रकार की शिकायतें पहले भी सामने आती रही हैं, लेकिन अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से प्रबंधन के हौसले बुलंद नजर आते हैं। यदि इन आरोपों में सच्चाई है, तो यह केवल आर्थिक शोषण का मामला नहीं बल्कि बच्चों के शिक्षा अधिकार और उनके भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय है।

बताया गया कि इस संबंध में जब संबंधित शिक्षा अधिकारियों से पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो स्पष्ट जवाब नहीं मिल सका। इससे यह सवाल और गहरा हो जाता है कि निजी विद्यालयों की कार्यप्रणाली की निगरानी आखिर कौन कर रहा है? क्या नियम केवल कागजों तक सीमित हैं या उनका पालन भी कराया जाएगा?

अब अभिभावकों की मांग है कि शिक्षा विभाग पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराए, विद्यालय की फीस, पुस्तक, यूनिफॉर्म और टीसी संबंधी व्यवस्था की समीक्षा करे तथा यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाए तो नियमानुसार सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। क्योंकि सवाल केवल फीस या किताबों का नहीं, बल्कि उन बच्चों के भविष्य का है जिनकी शिक्षा के नाम पर किसी भी तरह की मनमानी स्वीकार नहीं की जा सकती।

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